आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल पौष्टिक भोजन करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही समय और सही मात्रा में खाना भी उतना ही जरूरी माना जाता है।
डॉक्टर ने बताया सेहतमंद रहने का आसान फॉर्मूला
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, यदि लोग अपनी दिनचर्या में एक सरल नियम शामिल कर लें, तो लाइफस्टाइल से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि व्यक्ति को हमेशा अपनी पूरी भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए और जहां तक संभव हो, सूर्यास्त के बाद भोजन करने से बचना चाहिए।
कम खाना क्यों है फायदेमंद?
विशेषज्ञों के मुताबिक जरूरत से अधिक भोजन करने पर पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है और समय के साथ मोटापा, ब्लड शुगर असंतुलन, फैटी लिवर तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं सीमित मात्रा में भोजन करने से शरीर भोजन को बेहतर तरीके से पचा पाता है।
देर रात भोजन करने से बढ़ सकती हैं दिक्कतें
देर रात खाना खाने की आदत भी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रात में शरीर की पाचन प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी हो जाती है। ऐसे में देर से भोजन करने पर पाचन संबंधी परेशानियां, वजन बढ़ना और मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
आयुर्वेद भी देता है यही सलाह
आयुर्वेद में भी भोजन को समय पर और सीमित मात्रा में करने पर विशेष जोर दिया गया है। माना जाता है कि सही समय पर संतुलित भोजन करने से पाचन शक्ति बेहतर रहती है और शरीर की ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।
वजन नियंत्रण में भी मिल सकती है मदद
यदि भोजन नियंत्रित मात्रा में और सही समय पर किया जाए, तो इससे अनावश्यक कैलोरी सेवन कम हो सकता है। यह आदत वजन नियंत्रित रखने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में सहायक हो सकती है।
ध्यान रखें यह जरूरी बात
हालांकि, यह सलाह सभी लोगों पर समान रूप से लागू नहीं होती। जिन लोगों को मधुमेह, गर्भावस्था, गंभीर बीमारी या अन्य विशेष चिकित्सकीय स्थितियां हैं, उन्हें अपने भोजन का समय और मात्रा तय करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह जरूर लेनी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

