लाइफस्टाइल : सिरदर्द, दांत का दर्द, कमर में खिंचाव या शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने पर अक्सर लोग बिना ज्यादा सोचे वही दवा ले लेते हैं, जिससे पहले उन्हें आराम मिला था। यह आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन हर तरह के दर्द का कारण एक जैसा नहीं होता। ऐसे में हर बार एक ही दर्दनिवारक दवा लेना सुरक्षित तरीका नहीं माना जा सकता।
दर्द कई बार शरीर में चल रही किसी समस्या का संकेत होता है। इसलिए केवल दर्द को कुछ समय के लिए दबाने के बजाय उसके कारण को समझना ज्यादा जरूरी है। खासकर बार-बार होने वाले या असामान्य दर्द में खुद से दवा लेने की आदत परेशानी बढ़ा सकती है।
दर्द की जगह बदलने के साथ बदल सकती है वजह भी
सिर में होने वाला दर्द तनाव, नींद की कमी या माइग्रेन जैसी वजहों से हो सकता है। वहीं पेट, सीने या शरीर के किसी दूसरे हिस्से में दर्द के पीछे अलग कारण हो सकते हैं। अचानक बहुत तेज दर्द कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
इसीलिए केवल यह सोचकर दवा नहीं लेनी चाहिए कि पहले इसी तरह के दर्द में वही पेनकिलर काम कर चुकी है। दर्द का कारण अलग होने पर उपचार का तरीका भी अलग हो सकता है।
दवा लेने से पहले अपनी स्थिति को समझना जरूरी
किसी भी दर्दनिवारक दवा का इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह व्यक्ति के लिए सुरक्षित है या नहीं। उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां और चल रही दूसरी दवाएं इस फैसले को प्रभावित कर सकती हैं।
कुछ दर्दनिवारक दवाओं से पेट में जलन या रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं कुछ दवाओं की ज्यादा मात्रा लिवर या किडनी पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इसलिए बार-बार या जरूरत से ज्यादा दवा लेने से बचना चाहिए।
अलग नाम वाली दवाओं में एक ही घटक हो सकता है
पेनकिलर लेते समय केवल ब्रांड का नाम देखना पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग कंपनियों की दवाओं में एक जैसा सक्रिय घटक मौजूद हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी कई दवाएं एक साथ ले लेता है, तो उसे पता चले बिना उसी दवा की कुल मात्रा बढ़ सकती है।
इसलिए दवा खरीदने या लेने से पहले उसके active ingredients और निर्धारित मात्रा की जानकारी देखना जरूरी है। एक जैसे सक्रिय घटक वाली अलग-अलग दवाओं को अपनी मर्जी से साथ लेने से बचना चाहिए।
खाली पेट दवा लेने का नियम हर पेनकिलर पर लागू नहीं होता
यह मान लेना सही नहीं है कि हर दर्दनिवारक दवा खाली पेट नहीं ली जा सकती या हर दवा भोजन के बाद ही लेनी चाहिए। अलग-अलग दवाओं के इस्तेमाल के निर्देश अलग हो सकते हैं।
कुछ दवाएं पेट पर असर डाल सकती हैं, इसलिए पैकेट पर दिए निर्देशों का पालन करना जरूरी है। यदि दवा को लेकर कोई भ्रम हो तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सही तरीका पूछना बेहतर है।
कुछ लोगों को पेनकिलर में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए
बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और लिवर, किडनी, पेट या हृदय से जुड़ी समस्या वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्दनिवारक दवा शुरू नहीं करनी चाहिए।
इसी तरह यदि कोई व्यक्ति ब्लड थिनर या किसी अन्य नियमित दवा का सेवन करता है, तो नई पेनकिलर लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। दवाओं के बीच संभावित interaction को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।
कुछ दर्द ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ दवा खाकर दबाना सही नहीं
यदि दर्द अचानक बहुत तेज शुरू हुआ है, लगातार बढ़ रहा है या बार-बार वापस आ रहा है, तो केवल पेनकिलर लेकर उसे दबाते रहना उचित नहीं है।
सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी, गंभीर चोट के बाद तेज दर्द या तेज बुखार के साथ गंभीर दर्द जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
पुरानी बची हुई दवा को हर नए दर्द में इस्तेमाल न करें
घर में पहले से रखी हुई पेनकिलर को किसी नए दर्द में इस्तेमाल करना आसान जरूर लगता है, लेकिन यह सुरक्षित तरीका नहीं है। पुरानी दवा किसी अलग समस्या के लिए दी गई हो सकती है और हर बार वही दवा उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
दर्द यदि लगातार बना हुआ है या बार-बार लौट रहा है, तो दवा की मदद से उसे दबाने के बजाय उसके कारण की जांच कराना ज्यादा समझदारी है।
पेनकिलर के मामले में सबसे जरूरी है सही मात्रा और सही जरूरत
दर्दनिवारक दवा का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा और दिए गए निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। कौन सी दवा कितनी मात्रा में और कितने समय तक लेनी है, यह दवा के प्रकार और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
इसलिए हर दर्द के लिए एक ही पेनकिलर को अपना नियमित समाधान मानना सही नहीं है। सही दवा चुनने से पहले दर्द की वजह, अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पहले से चल रही दवाओं को ध्यान में रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

