तवांग : अरुणाचल प्रदेश के तवांग में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक विस्तार और वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज हो गया है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को कालावांगपो कन्वेंशन हॉल में ‘बुद्धिज्म: डिसेमिनेशन इन द हिमालयन रीजन एंड बियॉन्ड’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में भारत समेत सात देशों के धर्मगुरु, बौद्ध भिक्षु, विद्वान, शोधकर्ता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कन्फेडरेशन (IBC) और अरुणाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रसार, उसकी शिक्षाओं, मठ परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा करना है। यह आयोजन भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी से जुड़े कार्यक्रमों का भी हिस्सा है। संस्कृति मंत्रालय और अरुणाचल प्रदेश सरकार की इस पहल के जरिए भारत की बौद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
नेपाल से जर्मनी तक के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा
आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन में भारत के अलावा नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया और जर्मनी के प्रतिनिधियों के शामिल होने की अपेक्षा है। चर्चा के दौरान बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक प्रसार, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और मौजूदा दौर में भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता जैसे विषयों पर विचार साझा किए जाएंगे।
तीन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श
सम्मेलन की चर्चा को तीन प्रमुख विषयों में बांटा गया है। पहला विषय भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी शिक्षाओं और विरासत को आगे बढ़ाने से संबंधित है। इसमें चार आर्य सत्य, बौद्ध परंपराओं की निरंतरता, धार्मिक संस्थानों के विकास और पवित्र अवशेषों के संरक्षण पर चर्चा होगी।दूसरा विषय बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक और सैद्धांतिक निरंतरता पर केंद्रित है। इसके तहत विभिन्न बौद्ध संप्रदायों, धार्मिक ग्रंथों, मठ परंपराओं और पीढ़ियों के बीच ज्ञान के हस्तांतरण पर विचार किया जाएगा। इस चर्चा में अरुणाचल प्रदेश की बौद्ध परंपराओं और यहां की मठ व्यवस्था को भी विशेष स्थान दिया जाएगा।तीसरे विषय में बौद्ध दर्शन और सम्यक आजीविका यानी राइट लाइवलीहुड के संबंधों पर मंथन होगा। इसमें बुद्ध के नैतिक सिद्धांतों को आधुनिक जीवन, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और सतत विकास से जोड़कर समझने का प्रयास किया जाएगा। बौद्ध पर्यटन, तीर्थयात्रा और वैश्वीकरण के दौर में बौद्ध मूल्यों की भूमिका भी चर्चा का हिस्सा होगी।
तवांग पहुंचे भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष
सम्मेलन के साथ अरुणाचल प्रदेश में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है। नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों को विशेष व्यवस्था के तहत तवांग लाया गया है।31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान और हेलीकॉप्टर की मदद से इन अवशेषों को अरुणाचल प्रदेश पहुंचाया गया। इसके बाद तवांग के ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से मठ, जिसे तवांग मठ के नाम से भी जाना जाता है, में पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका स्वागत किया गया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, बौद्ध भिक्षु, धार्मिक नेता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस आयोजन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने पवित्र पिपरहवा अवशेषों की एक सदी से अधिक समय बाद भारत में प्रदर्शनी को गौरव का अवसर बताया।
तीन प्रमुख बौद्ध केंद्रों में होंगे अवशेषों के दर्शन
पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी को अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के तीन प्रमुख बौद्ध केंद्रों में आयोजित किया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:
- तवांग: 1 से 7 नवंबर तक तवांग मठ यानी गादेन नामग्याल ल्हात्से में।
- बोमडिला: 8 से 13 नवंबर तक टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा) में।
- नामसाई: 14 से 20 नवंबर तक गोल्डन पैगोडा में।
प्रदर्शनी पूरी होने के बाद 21 नवंबर को पवित्र अवशेषों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय वापस पहुंचाया जाएगा।इस आयोजन के साथ ‘अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा: द स्टोरी ऑफ द होली बुद्धा रेलिक्स एंड देयर डिस्कवरी’ शीर्षक से एक विशेष ऐतिहासिक प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें पिपरहवा में अवशेषों की खोज, उनके पुरातात्विक महत्व और भारत वापसी की यात्रा से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।
वैश्विक मंच पर सामने आएगी हिमालयी बौद्ध परंपरा
तवांग बौद्ध धर्म, खासकर तिब्बती बौद्ध परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थित तवांग मठ देश के महत्वपूर्ण बौद्ध मठों में शामिल है। क्षेत्र में सदियों से मठों, धार्मिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के जरिए बौद्ध दर्शन और परंपराओं का संरक्षण होता रहा है।अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए इन परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की योजना है। विभिन्न देशों से आए विद्वान अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे। साथ ही इस बात पर भी चर्चा होगी कि बौद्ध धर्म हिमालयी क्षेत्रों से आगे बढ़कर एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों तक किस तरह पहुंचा।आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य शांति, करुणा, अहिंसा, सह-अस्तित्व और संयम जैसे बौद्ध मूल्यों को बढ़ावा देना है। आयोजकों के अनुसार, भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी समाज, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। सम्मेलन और पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

