नई दिल्ली। दिल्ली की अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर्ज होने के बावजूद राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उसकी हिस्सेदारी पिछले एक दशक में कम हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 9.17 प्रतिशत बढ़कर 12.15 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, लेकिन देश की कुल GDP में राजधानी का योगदान 2015-16 के 4 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 3.67 प्रतिशत रह गया।
राष्ट्रीय औसत से धीमी रही आर्थिक रफ्तार
दिल्ली विधानसभा में पेश की गई CAG रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी की आर्थिक वृद्धि देश की समग्र विकास दर के मुकाबले अपेक्षाकृत धीमी रही। वर्ष 2015 से 2025 के बीच दिल्ली का प्रति व्यक्ति GSDP औसतन 6.39 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा, जबकि इसी अवधि में देश का प्रति व्यक्ति GDP 8.14 प्रतिशत की दर से बढ़ा। रिपोर्ट के अनुसार इससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्तर की तुलना में दिल्ली की विकास गति अपेक्षाकृत कम रही।
पूंजीगत खर्च में आई बड़ी गिरावट
रिपोर्ट में सबसे अधिक चिंता पूंजीगत व्यय में आई कमी को लेकर जताई गई है। वर्ष 2021-22 में जहां कैपिटल एक्सपेंडिचर 8,311 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 3,695 करोड़ रुपये रह गया। CAG का कहना है कि पूंजीगत निवेश में कमी का सीधा असर आधारभूत ढांचे के विकास और नई परिसंपत्तियों के निर्माण पर पड़ सकता है।
राजस्व खर्च बढ़ा, सब्सिडी पर भी बढ़ा बोझ
रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस वर्षों में कुल सरकारी खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय का रहा। इस दौरान कुल खर्च में हुई वृद्धि का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा राजस्व मद में खर्च हुआ। वहीं सब्सिडी पर होने वाला खर्च भी तेजी से बढ़ा। कुल सब्सिडी में 3,222 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें अकेले बिजली सब्सिडी का हिस्सा 2,033 करोड़ रुपये रहा।
स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर कम खर्च
CAG ने यह भी पाया कि स्थानीय निकायों और सरकारी संस्थाओं को दी जाने वाली सहायता का बहुत छोटा हिस्सा ही स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में लगाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में नगर निगम, दिल्ली परिवहन निगम (DTC), दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और DUSIB समेत विभिन्न संस्थाओं को 16,449 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया, लेकिन इसमें से केवल 1,110 करोड़ रुपये यानी करीब 6.75 प्रतिशत राशि ही पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए निर्धारित की गई।
नगर निगम को सबसे अधिक अनुदान
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 9,282 करोड़ रुपये नगर निगम और नगर पालिकाओं को मिले। इसके अलावा DTC को 2,620 करोड़ रुपये, दिल्ली जल बोर्ड को 633 करोड़ रुपये और DUSIB को 162 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। हालांकि नगर निगमों के लिए पूंजीगत अनुदान में भी गिरावट दर्ज की गई, जो 2023-24 के 649 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 499 करोड़ रुपये रह गया।
GST से बढ़ी आमदनी, गैर-कर राजस्व में कमी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024-25 में दिल्ली सरकार की राजस्व प्राप्तियों में 9.57 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका प्रमुख कारण GST सहित कर संग्रह में बढ़ोतरी रहा। दूसरी ओर गैर-कर राजस्व में 11.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे आय के इस स्रोत में कमी देखने को मिली।

