भारत : 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शनिवार को एक अनोखा वैश्विक अभियान आयोजित किया गया। ‘सूर्यपथ तिरंगा’ नाम की इस पहल में दुनिया के अलग-अलग टाइम जोन में मौजूद 54 भारतीय दूतावासों और मिशनों ने हिस्सा लिया। अभियान के जरिए तिरंगे को डिजिटल माध्यम से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाया गया और सूर्य की दिशा के साथ भारत के स्वतंत्रता दिवस की भावना को विश्वभर में प्रदर्शित किया गया।
फिजी से शुरू हुई तिरंगे की वैश्विक यात्रा, सैन फ्रांसिस्को में हुआ समापन
इस विशेष अभियान की शुरुआत फिजी की राजधानी सुवा स्थित भारतीय उच्चायोग से हुई। इसके बाद तिरंगे की यह प्रतीकात्मक यात्रा अलग-अलग टाइम जोन से गुजरते हुए अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास तक पहुंची।
इस पूरी पहल में प्रशांत क्षेत्र से लेकर एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक मौजूद भारतीय मिशन शामिल हुए। इस तरह सूर्य के पश्चिम की ओर बढ़ने के साथ तिरंगे की प्रतीकात्मक यात्रा भी लगातार आगे बढ़ती रही।
19 घंटे से ज्यादा चला कार्यक्रम, कई महाद्वीप जुड़े एक सूत्र में
‘सूर्यपथ तिरंगा’ के तहत 19 घंटे से अधिक समय तक अलग-अलग देशों में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम आयोजित किए गए। एक मिशन में कार्यक्रम पूरा होने के बाद अगले टाइम जोन में मौजूद भारतीय मिशन ने इस क्रम को आगे बढ़ाया।
इस अनूठी व्यवस्था ने दुनिया के कई हिस्सों को भारत के स्वतंत्रता दिवस के एक साझा उत्सव से जोड़ दिया।
हर घर तिरंगा अभियान को मिली वैश्विक पहचान
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, यह पहल ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत आयोजित की गई। इसका उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय ध्वज और स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को देश की सीमाओं से बाहर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना था।
भारतीय समय के अनुसार यह यात्रा देर रात करीब 1:30 बजे फिजी से शुरू हुई और रात करीब 8:30 बजे सैन फ्रांसिस्को तक पहुंची। यानी सूर्य की दिशा के साथ तिरंगे की यह प्रतीकात्मक यात्रा कई टाइम जोन से होकर आगे बढ़ती रही।
सुव़ा से शुरू होकर एशिया के कई देशों तक पहुंचा तिरंगे का संदेश
फिजी के बाद अभियान न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से आगे बढ़ा। इसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमा, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों में भारतीय मिशनों ने इसमें भागीदारी की।
इसके बाद तिरंगे की यह प्रतीकात्मक यात्रा मध्य और पश्चिम एशिया तक पहुंची। उज्बेकिस्तान, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब समेत कई देशों में भी भारतीय मिशनों ने कार्यक्रम आयोजित किए। आगे यह क्रम अफ्रीका और यूरोप से होते हुए अमेरिका तक पहुंचा।
हर पड़ाव पर तिरंगा और राष्ट्रगान, देशभक्ति के रंग में रंगे भारतीय मिशन
अभियान के दौरान प्रत्येक भारतीय मिशन में तिरंगा फहराया गया। कई कार्यक्रमों में वंदे मातरम और राष्ट्रगान का सामूहिक गायन भी हुआ। अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय और भारत के मित्रों ने भी इन आयोजनों में भाग लेकर स्वतंत्रता दिवस की भावना को साझा किया।
सूरज की पहली किरण के साथ फिजी में लहराया तिरंगा
इस वैश्विक अभियान की शुरुआत फिजी के सुवा में सूरज की पहली किरणों के साथ हुई। भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर बताया कि सुवा में तिरंगा फहराए जाने के साथ ‘सूर्यपथ तिरंगा’ की शुरुआत हुई।
स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 8 बजे भारतीय उच्चायुक्त सुनीत मेहता ने सुवा स्थित इंडिया हाउस में तिरंगा फहराया। इसके साथ ही भारत के स्वतंत्रता दिवस का यह वैश्विक प्रतीकात्मक सफर शुरू हुआ, जो अलग-अलग टाइम जोन को पार करते हुए अमेरिका तक पहुंचा।

