Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan 16 August: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला की दैनिक पूजा और श्रृंगार परंपराओं के अनुसार किया जाता है। भगवान को मौसम और दिन के अनुरूप अलग-अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं और विभिन्न समय पर आरती व भोग की विशेष व्यवस्था होती है। 16 अगस्त को भी श्रद्धालु रामलला के निर्धारित समय के अनुसार दर्शन कर सकेंगे।
सुबह 6:30 बजे जागरण के साथ शुरू होती है रामलला की पूजा
रामलला की दैनिक सेवा सुबह भगवान के जागरण से शुरू होती है। सुबह करीब 6:30 बजे पहली आरती होती है। इसके बाद भगवान को लेप लगाने, स्नान कराने और श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी की जाती है। पूजा के बाद रामलला को दिन के मौसम के अनुरूप वस्त्र धारण कराए जाते हैं।
मौसम के हिसाब से बदलते हैं रामलला के वस्त्र और श्रृंगार
रामलला के वस्त्र और श्रृंगार में मौसम का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। गर्मी के मौसम में भगवान को आरामदायक और हल्के सूती वस्त्र पहनाए जाते हैं। प्रतिदिन भगवान का श्रृंगार अलग रूप में किया जाता है, जिससे भक्तों को उनके मनोहारी स्वरूप के दर्शन होते हैं। रामलला के लिए फूलों की मालाएं भी विशेष रूप से मंगाई जाती हैं।
दोपहर 12 बजे भोग आरती, भक्तों को मिलता है विशेष दर्शन का अवसर
रामलला की दैनिक पूजा में दोपहर की भोग आरती का विशेष महत्व है। निर्धारित दिनचर्या के अनुसार दोपहर 12 बजे भोग आरती की जाती है। इस दौरान भगवान को भोग अर्पित किया जाता है और मंदिर की पूजा परंपराएं आगे बढ़ती हैं।
शाम 7:30 बजे संध्या आरती, इसके बाद शुरू होती है शयन की तैयारी
दिन की पूजा व्यवस्था में शाम की आरती भी महत्वपूर्ण होती है। शाम करीब 7:30 बजे संध्या आरती होती है। इसके बाद रामलला को रात्रि विश्राम के लिए तैयार किया जाता है।
रात 8:30 बजे रामलला का शयन, 7:30 बजे तक ही दर्शन
दैनिक व्यवस्था के अनुसार रात करीब 8:30 बजे रामलला को शयन कराया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की सुविधा निर्धारित समय तक ही रहती है। भक्त शाम 7:30 बजे तक रामलला के दर्शन कर सकते हैं।
रामलला की दैनिक पूजा में हर चरण का है विशेष महत्व
जागरण, स्नान, श्रृंगार, भोग, आरती और शयन की पूरी प्रक्रिया भगवान की दैनिक सेवा परंपरा का हिस्सा है। अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन निर्धारित समयों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि वे अपनी यात्रा और दर्शन की योजना सुविधानुसार बना सकें।

