छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक शिक्षक को राज्योत्सव पर टिप्पणी करना महंगा पड़ गया। कुरूद ब्लॉक के नारी प्राइमरी स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक ढालूराम साहू ने 31 अक्टूबर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें उन्होंने लिखा — “बच्चों की शिक्षा व्यवस्था ठप और हम चले राज्य स्थापना दिवस मनाने। क्या हम राज्योत्सव मनाने के लायक हैं?” यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई, जिसके बाद विभाग ने इसे शासन विरोधी और आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की।
शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई
वायरल पोस्ट के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अभय जायसवाल ने बैठक बुलाकर मामले की जांच की। प्रारंभिक जांच में शिक्षक की पोस्ट को शासन के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी माना गया, जिसके आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, अधिकारी ने इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। विभाग का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है जो शासन या शिक्षा व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुंचाए।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
शिक्षक की पोस्ट के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। ढालूराम साहू का कहना है कि उनकी मंशा शासन की आलोचना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करना थी। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में अब तक छात्रों को पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। वहीं, शिक्षा विभाग का दावा है कि सभी जिलों में योजनाबद्ध तरीके से किताबें और अन्य सामग्री पहुंचाई जा रही हैं।
राज्योत्सव का आयोजन
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष राज्योत्सव का भव्य आयोजन 1 से 5 नवंबर तक राजधानी रायपुर में हुआ। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज शामिल हुए। वहीं, जिलों में तीन दिनों तक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी बीच शिक्षक की यह पोस्ट वायरल होने से मामला और गरमा गया।