रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया और हड़जोड़ समुदायों के लिए नई योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पात्र लोगों को हर साल 5,000 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। आदिम जाति विकास विभाग ने ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025’ के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में इस योजना की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सा में लगे लोगों के योगदान को सम्मान देना है।
इस योजना के तहत राज्य के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में परंपरागत रूप से वनौषधीय चिकित्सा में कार्यरत बैगा, गुनिया और हड़जोड़ लोगों को सम्मान राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर शुरू की गई है ताकि इन समुदायों के सेवा भाव और परंपरागत चिकित्सा ज्ञान को प्रोत्साहन मिल सके। विभाग की अधिसूचना के अनुसार, योजना का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ वनौषधीय ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना और इस पारंपरिक प्रणाली को संरक्षित करना है।
आदिम जाति विकास विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, जो व्यक्ति विगत तीन वर्षों से वनौषधीय चिकित्सा कार्य में लगे हैं और जिनके परिवार में यह ज्ञान दो पीढ़ियों से स्थानांतरित हो रहा है, उन्हें पात्र माना जाएगा। पात्र व्यक्तियों को हर साल 5,000 रुपये की राशि दी जाएगी। चयन प्रक्रिया ग्राम सभा के माध्यम से होगी, जहां पंचायत सचिव, सरपंच, मितानिन और स्कूल के प्रधानपाठक की अनुशंसा के बाद नामों की पुष्टि की जाएगी। इसके बाद समिति द्वारा सत्यापित सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को भेजी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक गौरव और प्राचीन ज्ञान का प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ समुदायों ने सदियों से लोकऔषधीय चिकित्सा की परंपरा को जीवित रखा है। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार उनके योगदान को सम्मान दे रही है और साथ ही इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी निभा रही है।”