वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने डेनमार्क के व्यापार एवं प्रतिस्पर्धा मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड से मुलाकात कर भारत-डेनमार्क द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के अवसरों की पहचान करने पर जोर दिया। ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करना और ऐसी साझेदारियां बनाना था, जिनसे दोनों पक्षों के व्यवसायों को लाभ हो। उन्होंने लिखा, “हमने भारत और डेनमार्क के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और गहरा करने तथा आपसी लाभ वाली साझेदारियों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है।”
डेनमार्क की कंपनियां भारत में बढ़ाएंगी निवेश
लिडेगार्ड ने बैठक में बताया कि डेनमार्क की लगभग 250 कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और इनमें 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से पहले ही निवेश को लेकर उत्साह दिख रहा है। कंपनियों से पूछे जाने पर 75 प्रतिशत ने जवाब दिया कि वे भारत में और अधिक निवेश करने जा रहे हैं।
व्यापार वार्ताओं में संवेदनशीलता का ध्यान जरूरी
पीयूष गोयल ने व्यापार वार्ताओं के दौरान सदस्य देशों की चिंताओं और संवेदनशीलताओं का सम्मान करने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा इस बात का ध्यान रखता है कि किसी भी देश की चिंताओं को नजरअंदाज न किया जाए।
नवीकरणीय ऊर्जा में भी मजबूत सहयोग
यह बैठक लिडेगार्ड की नई दिल्ली यात्रा के दौरान हुई। इससे पहले उन्होंने केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की थी। दोनों पक्षों ने ऑफशोर विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।भारत और डेनमार्क के बीच नवीकरणीय ऊर्जा, खासकर पवन ऊर्जा विकास और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में लंबे समय से साझेदारी रही है। गोयल-लिडेगार्ड बैठक में व्यापार-निवेश पर फोकस के साथ दोनों देश द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

