बॉलीवुड : अभिनेत्री अनन्या पांडे ने देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच जेन ज़ी पीढ़ी के रवैये और सोच की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी अपनी बात रखने से पीछे नहीं हट रही और अपनी मान्यताओं को लेकर मजबूती से खड़ी है।हाल ही में अनन्या ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रदर्शन से जुड़ी दो ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें साझा कीं। इनमें से एक तस्वीर में भारत के संविधान को हाथ में पकड़े हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरी तस्वीर में एक पिता अपनी बेटी के साथ नजर आ रहा है।इन तस्वीरों के साथ अभिनेत्री ने एक लंबा संदेश लिखते हुए कहा कि जेन ज़ी को अक्सर अलग-अलग नामों से पहचाना गया है, लेकिन मौजूदा समय यह दिखा रहा है कि यह पीढ़ी वास्तव में कैसी है।
‘सवाल पूछना अनादर नहीं है’: अनन्या ने रखी अपनी बात
अनन्या ने लिखा कि आज की युवा पीढ़ी केवल इसलिए किसी बात को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह हमेशा से चली आ रही है। उनका मानना है कि युवा किसी आसान रास्ते की मांग नहीं कर रहे, बल्कि वे निष्पक्ष व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अपनी आवाज उठाना विद्रोह नहीं बल्कि बेहतर बदलाव की उम्मीद है। उनके अनुसार, सवाल करना किसी का अपमान नहीं होता और यही बदलाव की शुरुआत बन सकता है।अभिनेत्री ने अपने संदेश के अंत में देश और लोगों के प्रति अपने लगाव को जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपने देश पर गर्व है।
सोशल मीडिया पर मिला मिला-जुला रिएक्शन
अनन्या के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों का समर्थन किया, वहीं कई लोगों ने सवाल उठाते हुए इसे देर से आया बयान बताया।कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि बॉलीवुड सितारे अक्सर ट्रेंड बनने के बाद अपनी राय रखते हैं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर कलाकार पहले ही छात्रों के मुद्दों पर बोलते तो उनकी बात ज्यादा प्रभावी होती।
पेपर लीक और परीक्षा सुधार को लेकर जारी है प्रदर्शन
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।इस बीच सोनम वांगचुक भी छात्रों के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं। उनकी भूख हड़ताल और जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया।प्रदर्शन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता दी गई। वहीं, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच तनाव को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है।

