1956 से पहले मरने वाले पिता की संपत्ति पर बेटियों का नहीं है हक, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दी बड़ी कानूनी टिप्पणी

रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर किसी पिता की मृत्यु 1956 से पहले हुई है, तो उसकी संपत्ति पर बेटियों का कोई अधिकार नहीं होगा। कोर्ट ने यह फैसला हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) की व्याख्या करते हुए सुनाया, जिससे देशभर में समान प्रकृति के मामलों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

मामला क्या था?

यह मामला बस्तर जिले के एक परिवार से जुड़ा था, जहां पिता की मृत्यु 1954 में हो गई थी। मृत्यु के बाद बेटों ने पैतृक संपत्ति पर कब्जा कर लिया, जबकि बेटियों ने अपने हिस्से की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बेटियों का तर्क था कि उन्हें भी पिता की संपत्ति में समान हिस्सा मिलना चाहिए, क्योंकि अब कानून महिलाओं को बराबरी का अधिकार देता है।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 से पहले यह कानून लागू नहीं था, इसलिए उस समय हुई मृत्यु पर बेटियों को संपत्ति में अधिकार नहीं मिल सकता। न्यायमूर्ति ने कहा, कानून पीछे जाकर लागू नहीं किया जा सकता। यदि पिता की मृत्यु 1956 से पहले हुई है, तो बेटियों को उस संपत्ति में हिस्सा देने का कोई प्रावधान नहीं है।”

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देशभर में कई पुराने संपत्ति विवाद इसी तरह की स्थिति में फंसे हैं। कोर्ट के इस निर्णय से अब यह स्पष्ट हो गया है कि 1956 से पहले हुई मृत्यु के मामलों में बेटियों का हक लागू नहीं होगा, भले ही संपत्ति अब भी परिवार के पास ही क्यों न हो।zक्या कहता है हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम? 1956 में लागू हुए इस अधिनियम के तहत बेटियों को भी बेटों के बराबर पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने का अधिकार मिला। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में कहा है कि यह कानून सिर्फ 1956 के बाद हुए उत्तराधिकारों पर ही लागू होता है।

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