CG News: रायपुर 26 सितंबर 2025। शालेय शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को निजी मोबाइल पर VSK एप डाउनलोड कर ई-अटेंडेंस दर्ज कराने की बाध्यता पर कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है और इससे साइबर सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि किसी भी एप को डाउनलोड करने के लिए मोबाइल धारक को कैमरा और डाटा की अनुमति देनी पड़ती है। इससे निजी जानकारियों के दुरुपयोग, डाटा लीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व डीप फेक तकनीक से अपराध बढ़ने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि निजी मोबाइल पर दबावपूर्वक एप डाउनलोड कराना न केवल शिक्षकों बल्कि उनके परिवार की भी सुरक्षा को खतरे में डालता है। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर पायलट प्रोजेक्ट को तत्काल बंद करना चाहिए।
CG News: महासचिव धर्मेश शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या शिक्षा विभाग को अपने मातहत अधिकारियों पर भरोसा नहीं रहा है? विभाग में CAC, संकुल प्राचार्य, संस्थाप्रमुख, BRCC, ABEO और BEO जैसे अधिकारी पहले से मौजूद हैं, जो निरीक्षण और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में मोबाइल एप के जरिए निगरानी करना अनावश्यक और अव्यवहारिक है।
नेटवर्क और सर्वर की समस्या
CG News: प्रदेश के कई वनांचल और दूरस्थ इलाकों में आज भी मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। शहरी क्षेत्रों में भी सर्वर डाउन और नेटवर्क समस्या आम बात है। ऐसे में मोबाइल नेटवर्क आधारित उपस्थिति प्रणाली अप्रासंगिक है। संगठन का कहना है कि इस व्यवस्था से निचले स्तर के अधिकारी शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं और अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
निजी संपत्ति पर दबाव
CG News: संघ पदाधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन शिक्षक की निजी संपत्ति है, जिसमें व्यक्तिगत फोटो, बैंकिंग जानकारी और महत्वपूर्ण दस्तावेज रहते हैं। ऐसे में एप डाउनलोड करने की जबरदस्ती निजता का हनन है और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
सामूहिक मांगें
CG News: संगठन के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष चन्द्रशेखर तिवारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा सहित सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ. सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, विवेक शर्मा, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेश सिंह, संतोष मिश्रा, शिवेंद्र चंद्रवंशी समेत दर्जनों पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि इस पायलट प्रोजेक्ट को तत्काल बंद किया जाए। उनका कहना है कि विभाग बार-बार प्रयोग कर शिक्षकों पर बोझ डालता है, लेकिन योजनाओं की असफलता की जिम्मेदारी कभी भी अधिकारियों पर तय नहीं की जाती।