नीट पेपर लीक: परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर जारी विरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेगा। सरकार की ओर से तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए सहमति मिलने के बाद यह बैठक आयोजित की जा रही है।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होगी चर्चा
सीजेपी पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर धरना देकर परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और सुधार की मांग कर रही है। पार्टी ने बताया कि उसने सरकारी कार्यालय में बैठक करने के बजाय किसी निष्पक्ष स्थान पर बातचीत की मांग रखी थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब वार्ता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में होगी।सीजेपी सदस्य सौरभ दास ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा के लिए बुलावा आया है और पार्टी इस बात से संतुष्ट है कि बातचीत के लिए तटस्थ स्थान का चयन किया गया है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराएगी सीजेपी
सीजेपी का कहना है कि नीट पेपर लीक विवाद से निपटने की जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है। पार्टी इस मामले में उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा संगठन ने देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार की मांग भी रखी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
सरकार ला रही सख्त कानून, कैबिनेट में होगी चर्चा
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने वालों के खिलाफ कठोर प्रावधान और सजा वाला नया कानून लाने की तैयारी कर रही है।उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक के खिलाफ और अधिक कड़े कदम उठाए जाएंगे। प्रस्तावित विधेयक पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है और इसके बाद इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है।
सीजेपी का कहना, केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं
प्रधानमंत्री के सख्त रुख के बावजूद सीजेपी का कहना है कि सिर्फ नया कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।सीजेपी शुक्रवार को होने वाली बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि पेपर लीक विवाद पर सरकार का सबसे बड़ा कदम जिम्मेदारी तय करना होना चाहिए।

