भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग को लेकर अपना रुख फिर स्पष्ट किया है। भारत का कहना है कि यदि सुरक्षा परिषद में नए देशों को स्थायी सदस्यता दी जाती है, तो उन्हें मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के समान अधिकार भी मिलने चाहिए। केवल स्थायी सदस्य बना देना और वीटो पावर से दूर रखना समानता के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
भारत के अनुसार, ऐसी व्यवस्था लागू होने पर नए स्थायी सदस्यों की स्थिति पुराने सदस्यों से कमजोर बनी रहेगी। अहम फैसलों पर वास्तविक नियंत्रण पहले की तरह पांच देशों के पास ही रहेगा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में वीटो पावर से जुड़े मुद्दे पर आयोजित बैठक के दौरान यह पक्ष रखा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि यदि वीटो का अधिकार जारी रखा जाता है, तो सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने समानता और न्याय के लिए सभी स्थायी सदस्यों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को बराबर रखने की जरूरत पर जोर दिया।
क्या है वीटो पावर और भारत इसका विरोध क्यों कर रहा है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इन पांचों देशों को वीटो पावर हासिल है। इसके तहत किसी अहम प्रस्ताव पर इनमें से एक भी देश वीटो कर दे, तो प्रस्ताव पारित होने से रुक सकता है।
बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं, जिनका कार्यकाल दो साल का रहता है। भारत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्यों के पास अत्यधिक अधिकार केंद्रित हैं। ऐसे में नए देशों को स्थायी सदस्यता तो मिल जाए, लेकिन वीटो का अधिकार न दिया जाए, तो फैसले लेने की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बुनियादी बदलाव नहीं होगा।
1945 की व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर
भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी। उस समय की वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई व्यवस्था आज की दुनिया की वास्तविकताओं और जरूरतों को पूरी तरह नहीं दर्शाती। बीते दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बदलाव हुए हैं, इसलिए सुरक्षा परिषद में भी सुधार करना जरूरी है।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल करने की मांग करता रहा है। भारत का पक्ष है कि परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के लिए स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

