नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मंगलवार को छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने Gen-Z की समस्याओं, रोजगार के अवसर, सरकारी भर्तियों और निजी क्षेत्र में आरक्षण जैसे मुद्दों पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया।
मायावती ने कहा कि देश में युवाओं के सामने रोजगार और अन्य कई गंभीर चुनौतियां हैं। उनके मुताबिक, इन समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक दल अलग-अलग मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हैं। उन्होंने छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे अपने मुद्दों को लेकर किसी भी राजनीतिक दल के इस्तेमाल से सावधान रहें।
संसद में हंगामे को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों पर मायावती का हमला
मायावती ने आरोप लगाया कि संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव के कारण जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही प्रभावित होने से जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पा रही है।
उन्होंने सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं और आम जनता को अपने हितों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों की गतिविधियों को समझने की जरूरत है।
Gen-Z की समस्याओं को लेकर युवाओं से बोलीं मायावती, राजनीतिक इस्तेमाल से रहें दूर
मायावती ने देश के छात्रों और युवाओं की रोजगार, शिक्षा और भविष्य से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी कई समस्याओं के कारण परेशान है और इन मुद्दों का समाधान गंभीरता से होना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने आंदोलनों और मांगों को किसी दल की संकीर्ण राजनीतिक रणनीति का हिस्सा न बनने दें। उनका कहना था कि युवाओं को अपने मुद्दों के लिए राजनीतिक दलों की मदद का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए, लेकिन अपने आंदोलन का नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहिए।
दिल्ली के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं से जुड़े प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर आंदोलन को अपने राजनीतिक हित में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं से जुड़े आंदोलन का राजनीतिक दलों द्वारा इस्तेमाल किया जाना उचित नहीं है। मायावती ने छात्रों और युवाओं से कहा कि वे अपने वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित रहें और किसी भी राजनीतिक दल को उनके आंदोलन का फायदा उठाने का अवसर न दें।
सरकारी भर्तियों और रोजगार को लेकर BSP ने अपने पुराने रुख का किया जिक्र
मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में BSP सरकार के दौरान सरकारी विभागों में लंबे समय से रुकी भर्तियों को आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया था।
उन्होंने यह भी कहा कि BSP सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के पक्ष में रही है। उनके मुताबिक, युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तैयार करना सरकारों की प्रमुख जिम्मेदारी होनी चाहिए।
दलित, आदिवासी और OBC के आरक्षण को लेकर मायावती ने जताई चिंता
BSP प्रमुख ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने और निजी क्षेत्र के विस्तार के कारण आरक्षण व्यवस्था से लाभ पाने वाले वर्गों के सामने नई चुनौतियां पैदा हुई हैं।
उन्होंने विशेष रूप से दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के सरकारी रोजगार में प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई। मायावती का कहना है कि सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित होने के साथ इन वर्गों के लिए आरक्षण का व्यावहारिक लाभ भी प्रभावित हो रहा है।
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग, मायावती ने बताया BSP का रुख
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी निजी क्षेत्र के विकास के खिलाफ नहीं है। हालांकि उनका तर्क है कि जब सरकारी क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, तो निजी क्षेत्र में भी इन वर्गों को रोजगार के अवसरों में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि BSP सरकार के समय सरकारी सहयोग से स्थापित उद्योगों में आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी। मायावती ने निजी क्षेत्र में आरक्षण को सामाजिक प्रतिनिधित्व और रोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए इसे लागू करने की मांग दोहराई।
युवाओं के रोजगार से जुड़ी बहस को नई राजनीतिक दिशा देने की कोशिश
मायावती के बयान से साफ है कि BSP आने वाले राजनीतिक विमर्श में युवाओं, रोजगार और आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता देना चाहती है। खासतौर पर निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग ऐसे समय उठाई गई है, जब सरकारी नौकरियों के सीमित अवसर और निजी क्षेत्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस लगातार जारी है।

