रायपुर। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरू मध्य में कई देशों के मालवाहक जहाज फंसे हैं। ऐसे ही एक जहाज में राजधानी रायपुर के रूद्रांश चौबे भी फंसे थे। करीब 3 माह बाद कंपनी ने उन्हें सुरक्षित निकाला। इसके बाद वे अपने घर लौटे। जहाज के ऊपर मिसाइलों और ड्रोनों को उड़ता देख रुद्रांश को लगता था कि वह साक्षात मौत को देख रहे हैं। रूद्रांश कतर से यूरिया लेकर भारत आ रहे जहाज के क्रू मेंबरों में शामिल थे। जहाज अभी भी होर्मुज में फंसा है।
मौत के भय में गुजरे दिन
युद्ध की भयावह स्थिति को रुद्रांश ने करीब से देखा। वह दुर्गा कॉलेज में पदस्थ प्राध्यापक व एनसीसी अधिकारी स्क्वाडून लीडर डॉ. विजय कुमार चौबे के बेटे हैं। रुद्रांश ने बताया कि इजिप्ट में कंपनी जॉइन की और 12 दिसंबर को यूएन के निर्देश पर इजिप्ट से कॉर्न लेकर यमन रवाना हुए। 8-9 दिन बाद यमन पहुंचे और कॉर्न खाली कर सूडान गए। इसके बाद कतर होते हुए भारत आ रहे थे।
22 क्रू मेंबरों में प्रदेश से एकलौता
जहाज के 22 क्रू मेंबरों में रूद्रांश पहली बार समुद्र में लंबे सफर पर निकले थे। उन्होंने बताया कि मिसाइलों को देखकर सभी दहशत में रहते थे, लेकिन एनसीसी में सिखाया गया है कि विपरीत परिस्थितियों में कैसे अपना धैर्य बनाए रखना है। होर्मुज में फंसे रहने के दौरान तनाव न बढ़े, इसलिए सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जहाज में ही काम करते रहते थे। जहाजों के क्रू मेंबरों में रुद्रांश छत्तीसगढ़ से इकलौते कर्मचारी थे।
6 माह का था कंपनी के साथ कान्ट्रेक्ट
रुद्रांश ने बताया कि नवी मुंबई की मर्चेंट नेवी ट्रेनिंग अकादमी में 3 साल का बीएससी नॉटिकल कोर्स किया। इस दौरान उनका कैम्पस सलेक्शन हुआ। इसके बाद दुनिया की नामी कंपनी के साथ 6 माह का कान्ट्रेक्ट हुआ। इसमें डेक कैडेट ट्रेनी नेवीगेटिंग ऑफिसर के रूप में ज्वाइन किया। होर्मुज में जहाज फंसे रहने के बीच ही उनका कॉन्ट्रेक्ट खत्म हो गया। इस कारण घर आ गया।

