बौद्ध धर्म की आस्था और इतिहास से जुड़ी पवित्र नगरी सारनाथ को अब वैश्विक पहचान मिल गई है। यूनेस्को ने 25 जुलाई को सारनाथ को भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे देश में खुशी का माहौल है।केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे देश और विशेष रूप से वाराणसी के लोगों के लिए गर्व का क्षण बताया है।
यूनेस्को की सूची में शामिल हुआ सारनाथ का नाम
दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में सारनाथ को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया।केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और नेतृत्व में भारत की इस प्राचीन धार्मिक और पुरातात्विक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।उन्होंने बताया कि सारनाथ को वर्ष 1998 में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। लंबे इंतजार के बाद अब इसे स्थायी रूप से विश्व धरोहर का दर्जा मिला है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ
सारनाथ को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने के बाद यहां देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे वाराणसी की पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।स्थानीय लोगों और बौद्ध अनुयायियों का मानना है कि इस उपलब्धि के बाद सारनाथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान बनाएगा।
यही से शुरू हुआ था बुद्ध के संदेशों का प्रसार
सारनाथ बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान गौतम बुद्ध ने यहीं अपना पहला उपदेश दिया था। इस घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन के नाम से जाना जाता है।इसी स्थान से बुद्ध के उपदेशों और बौद्ध धर्म के विस्तार की शुरुआत मानी जाती है।
प्राचीन स्मारक बताते हैं हजारों साल पुराना इतिहास
सारनाथ की धरोहर में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल शामिल हैं। इनमें चौखंडी स्तूप, धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और प्रसिद्ध अशोक स्तंभ प्रमुख हैं।चौखंडी स्तूप को उस स्थान के रूप में देखा जाता है, जहां भगवान बुद्ध अपने पहले शिष्यों से मिले थे। वहीं धमेख स्तूप और अन्य पुरातात्विक अवशेष सारनाथ के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं।
भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली नई मजबूती
सारनाथ का विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की प्राचीन सभ्यता, आध्यात्मिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

