रायपुर: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। छत्तीसगढ़ में भी इस अवसर को बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इस दौरान सभी ने “वंदे मातरम्” के उद्घोष के साथ स्वतंत्रता संग्राम की राष्ट्रीय चेतना का स्मरण किया और अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित स्मरणोत्सव में वर्चुअली शामिल होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्बोधन सुना। उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ मातृभूमि के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और राष्ट्रधर्म की भावना का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज पूरे देश ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन कर मातृभूमि को नमन किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 7 नवंबर 1875 को रचित यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा रहा है। इसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति का प्रतीक बन गया और असंख्य क्रांतिकारियों ने “वंदे मातरम्” कहते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1905 में बंगाल विभाजन के समय ‘वंदे मातरम्’ ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा दी। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक यह गीत राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक एकता का सूत्र बन गया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सुनते ही हर भारतीय के हृदय में गर्व और देशभक्ति का संचार होता है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारी भूमि, जल, अन्न और संस्कृति ही हमारी जीवनदायिनी शक्ति हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा, “यूरोप में भूमि को ‘फादरलैंड’ कहा जाता है, लेकिन भारत में हम अपनी भूमि को ‘मातृभूमि’ कहते हैं।” यह भावना रामायण के श्लोक “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” में भी झलकती है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ इसी भावना से जन्मा ध्येय-वाक्य है, जो भारत की एकता और आत्मगौरव का प्रतीक है।