Vat Savitri Vrat 2026: आज सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए वट सावित्री व्रत रख रही हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जाने वाला यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
वट सावित्री व्रत पीरियड्स में करने के नियम और विधि
वास्तु गुरु मान्या बताती हैं कि वट सावित्री व्रत महिलाएं पीरियड्स में भी कर सकती हैं। हालांकि, इस दौरान कुछ नियमों का ख्याल रखना आवश्यक है। वट सावित्री की पूजा सामग्री को बिना हाथ लगाए भी की जा सकती है। वट सावित्री व्रत के दिन किसी दूसरी सुहागिन से अपनी पूजा संपन्न करवा कर इस व्रत को पूर्ण किया जा सकता है। इस दौरान आप मानसिक रूप से पूजा और मंत्र जप कर सकती हैं।
वट सावित्री के दिन पीरियड्स
अगर आपको वट सावित्री के दिन पीरियड्स आ जाएं, तो ऐसी स्थिति में अपना व्रत छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। हमेशा की तरह सुबह उठकर मन में व्रत का संकल्प करें और पूरे दिन उपवास रखें। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। लेकिन पूजा के दौरान इस बात का ख्याल रखें की किसी भी प्रकार की पूजा सामग्री या भगवान की मूर्ति को आप हाथ न लगाएं। इसके लिए आप परिवार की किसी सुहागिन महिला की मदद ले सकती हैं।
पूजा के लिए अपनी पूजा की थाली में और सामग्री परिवार के किसी सदस्य से तैयार करवा लें और उसे किसी सुहागिन महिला को पकड़ा दें। आपकी जगह दूसरी सुहागिन महिला आपके नाम से वट वृक्ष पर जल अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद, उनसे कच्चे सूत के साथ वृक्ष की परिक्रमा लगवाएं। इस दौरान आप मानसिक जप करें।
वट वृक्ष से थोड़ी दूरी बनाकर बैठें और वहीं से पूरी विधि को देखती रहें। साथ ही, मन में भगवान का स्मरण करें और व्रत कथा को दूर से ध्यान लगाकर सुनें।
पीरियड्स के दौरान व्रत कथा भी सुनी जा सकती है। जब दूसरी महिलाएं कथा का पाठ करें, तो आप दूर से ही बैठकर उसे सुन सकती हैं। मन में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवी सावित्री का ध्यान करती रहें।
भगवान के मंत्रों का मानसिक जप करें। शास्त्रों के अनुसार, मानसिक पूजा और मंत्र जप का फल शारीरिक पूजा से भी अधिक प्राप्त होता है। पूजा और व्रत संपन्न होने के बाद लगाए गए भोग को आप प्रसाद के रूप में खा सकती हैं। अगर आपके पीरियड्स को 3 दिन पूरे हो चुके हैं और ये चौथा या पांचवां दिन हो, तो ऐसी स्थिति में सुबह बाल धोकर स्नान करने के बाद आप खुद भी सामग्री को हाथ लगा सकती हैं। साथ ही, वृक्ष की पूजा भी कर सकती हैं।
वट सावित्री व्रत का महत्व
सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करती हैं। फिर, सोलह श्रृंगार करके वट सावित्री व्रत करती हैं। साथ ही, विधि-विधान से वट वृक्ष और सावित्री देवी की पूजा करती हैं। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी सावित्री की कृपा प्राप्त हो सकती है और दांपत्य जीवन सुखद रहता है।
सावित्री-सत्यवान की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे। तब उनकी पत्नी सावित्री ने अपने तप और वाकचातुर्य से यमराज को प्रसन्न कर लिया। उन्होंने यमराज से तीन वरदान मांगे, जिनमें अंतिम वरदान में अपने लिए ‘सौ पुत्रों’ का सुख मांगा। यमराज ने ‘तथास्तु कह दिया। जिसके बाद उन्हें सत्यवान के प्राण वापस लौटाने पड़े क्योंकि बिना सत्यवान के सावित्री का मां बनना संभव नहीं था।

