भोपाल: मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट तैयार कराने के मामले में STF ने भोपाल के एक एजेंट नसीम अख्तर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक नसीम वर्ष 2016 से एमपी नगर में टूर एंड ट्रेवल्स का काम कर रहा था। बाद में उसने पासपोर्ट एजेंट के तौर पर भी काम शुरू कर दिया। पूछताछ के दौरान फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
रियाल चौधरी के संपर्क में था नसीम
STF की जांच में नसीम अख्तर का नाम रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से जुड़ा सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार रियाल चौधरी नेटवर्क का प्रमुख आरोपी है। नसीम ने पूछताछ में बताया कि रियाल के कहने पर उसने कुछ लोगों के लिए भोपाल से पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया पूरी की थी। STF के मुताबिक भोपाल में सामने आए करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से 10 के आवेदन तैयार कराने में नसीम की भूमिका सामने आई है।
एक पासपोर्ट के लिए 20 हजार रुपये लेने का दावा
पूछताछ में नसीम ने कथित तौर पर बताया कि पासपोर्ट बनवाने के एवज में उसे प्रति पासपोर्ट 20 हजार रुपये मिलते थे। जांच में पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े एक कर्मचारी की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। STF इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और दस्तावेज तैयार करने वाले साइबर कैफे संचालकों से भी पूछताछ कर रही है।
बौद्ध पहचान के सहारे तैयार किए गए दस्तावेज
STF की अब तक की जांच में सामने आया है कि कुछ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों ने भारत में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए खुद को बौद्ध अनुयायी या भिक्षु के तौर पर प्रस्तुत किया। इसके बाद कथित तौर पर स्थानीय पते और पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए गए और इन्हीं के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन किए गए। भोपाल के अन्नानगर स्थित एक बौद्ध मठ के पते से करीब 40 पासपोर्ट सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
डबरा से भोपाल तक फैला नेटवर्क
मामले की शुरुआत ग्वालियर के डबरा में एक ही पते से बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने की जांच से हुई थी। इसके बाद भोपाल के अन्नानगर से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आए। रिपोर्टों के मुताबिक अलग-अलग स्थानों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट सामने आ चुके हैं। STF अब असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।
विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड भी खंगाल रही STF
जांच एजेंसी अब इन पासपोर्ट के जरिए विदेश यात्रा करने वाले लोगों की जानकारी भी जुटा रही है। इसके लिए विदेश मंत्रालय, विमानन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से रिकॉर्ड लिया जा रहा है। जांच में कुछ पासपोर्ट धारकों की थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया और इंडोनेशिया यात्रा की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
पासपोर्ट सत्यापन व्यवस्था भी जांच के घेरे में
मामले ने केवल एजेंटों और कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका पर ही सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि पासपोर्ट आवेदन की सत्यापन प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। STF यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन कैसे आगे बढ़े और संबंधित स्तरों पर उनकी जांच किस तरह हुई। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

