हर साल 1 अक्टूबर को वर्ल्ड कॉफी डे मनाया जाता है। ज्यादातर लोगों की कॉफी की शुरुआत दूध और चीनी के साथ होती है, लेकिन समय के साथ कई लोग ब्लैक कॉफी पसंद करने लगते हैं। बिना दूध और चीनी की कॉफी में कैलोरी काफी कम रहती है और इसमें मौजूद कैफीन तथा अन्य प्राकृतिक कंपाउंड शरीर पर कुछ संभावित प्रभाव डाल सकते हैं।
हालांकि, ब्लैक कॉफी को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता। इसके संभावित फायदे तभी उपयोगी हो सकते हैं जब इसका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए।
कैलोरी कम रखने वालों के लिए आसान विकल्प हो सकती है ब्लैक कॉफी
बिना दूध, चीनी और क्रीम वाली कॉफी में कैलोरी बहुत कम होती है। एक सामान्य कप ब्लैक कॉफी में लगभग 2 से 4 कैलोरी हो सकती हैं। इसके विपरीत दूध, चीनी, क्रीम या फ्लेवर्ड सिरप मिलाने पर इसकी कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है।
इसलिए जो लोग रोज की कॉफी से अतिरिक्त कैलोरी कम करना चाहते हैं, उनके लिए बिना चीनी और दूध वाली कॉफी एक विकल्प हो सकती है।
कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर के लिए क्यों अहम हैं
कॉफी बीन्स में कई तरह के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से सीमित मात्रा में कॉफी को संतुलित खानपान का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हालांकि, सिर्फ कॉफी के भरोसे शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता। इसके साथ संतुलित भोजन लेना भी जरूरी है।
लिवर की सेहत से भी जुड़ा है कॉफी का सेवन
कॉफी के सेवन और लिवर की सेहत के बीच संबंध को लेकर कई अध्ययन हुए हैं। कुछ शोधों में कॉफी पीने और लिवर में फैट जमा होने सहित कुछ लिवर संबंधी स्थितियों के बीच संभावित लाभकारी संबंध देखा गया है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लैक कॉफी किसी लिवर बीमारी की दवा है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से लिवर से जुड़ी समस्या है, तो इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
यूरिक एसिड और गाउट के जोखिम को लेकर क्या कहता है संबंध
कॉफी और शरीर में यूरिक एसिड के स्तर के बीच भी संबंध का अध्ययन किया गया है। कुछ शोधों में कॉफी सेवन और गाउट के कम जोखिम के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कॉफी गाउट का इलाज करती है।
गाउट या यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह से ही अपनी डाइट और इलाज में बदलाव करना चाहिए।
वर्कआउट से पहले ब्लैक कॉफी क्यों पसंद करते हैं कई लोग
ब्लैक कॉफी में मौजूद कैफीन शरीर को सतर्क रखने और ऊर्जा महसूस करने में मदद कर सकता है। सीमित मात्रा में कैफीन कुछ लोगों में एक्सरसाइज के दौरान शारीरिक प्रदर्शन को बेहतर करने में भी मदद कर सकता है।
इसी वजह से कुछ लोग वर्कआउट से पहले ब्लैक कॉफी लेना पसंद करते हैं। हालांकि, कैफीन का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। ज्यादा कॉफी पीने से बेचैनी, नींद में परेशानी या दिल की धड़कन तेज महसूस होने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
फायदे के साथ मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी
ब्लैक कॉफी को डाइट में शामिल करते समय मात्रा का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। ज्यादा कैफीन लेना हमेशा ज्यादा फायदा देने वाला नहीं होता। खासतौर पर जिन लोगों को कैफीन से संवेदनशीलता है, उन्हें अपनी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए।

