भारत में गणेश चतुर्थी के साथ त्योहारी मौसम का माहौल बन चुका है। इस दौरान कपड़े, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, घर की सजावट, पूजा सामग्री और गिफ्ट जैसी चीजों की खरीदारी बढ़ जाती है। बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के ऑफर पेश करते हैं।
त्योहारों की खरीदारी में उत्साह के बीच अगर खर्च का हिसाब न रखा जाए तो इसका असर अगले महीने के बजट पर पड़ सकता है। कुछ सामान्य गलतियों से बचकर फेस्टिव शॉपिंग को अपनी जेब के मुताबिक रखा जा सकता है।
बिना प्लान बनाए खरीदारी शुरू करना
त्योहार की खरीदारी शुरू करने से पहले यह तय करें कि कुल कितना पैसा खर्च करना है। इसके बाद कपड़े, गिफ्ट, पूजा सामग्री और घर की सजावट जैसी अलग-अलग जरूरतों के लिए रकम निर्धारित करें।
बजट तय होने से गैरजरूरी सामान खरीदने की संभावना कम होती है और जरूरी खर्चों के लिए पैसा बचा रहता है।
सिर्फ बड़े डिस्काउंट के लालच में सामान खरीदना
फेस्टिव सीजन में 50 या 70 फीसदी तक छूट के दावे देखने को मिल सकते हैं। ऐसे ऑफर देखकर कई बार लोग ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं, जिनकी तत्काल जरूरत नहीं होती।
किसी ऑफर को देखकर खरीदारी करने से पहले प्रोडक्ट की वास्तविक कीमत, क्वालिटी और अपनी जरूरत जरूर जांचें। सिर्फ डिस्काउंट प्रतिशत देखकर फैसला लेना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
क्रेडिट कार्ड की लिमिट को बजट समझ लेना
क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना सुविधाजनक है, लेकिन कार्ड की उपलब्ध लिमिट को अपना खर्च करने का बजट मानना भारी पड़ सकता है। जितना खर्च कर रहे हैं, उतनी रकम समय पर चुकाने की क्षमता भी होनी चाहिए।
अगर पूरा बिल समय पर नहीं चुकाया जाता है तो ब्याज और अन्य शुल्क का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसलिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तय बजट के भीतर ही करें।
एक ही जगह से कीमत देखकर खरीद लेना
त्योहारी सीजन में एक ही प्रोडक्ट की कीमत अलग-अलग दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अलग हो सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले कम से कम दो-तीन जगह कीमत की तुलना करना उपयोगी रहता है।
सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि वारंटी, रिटर्न पॉलिसी, डिलीवरी चार्ज और उपलब्ध ऑफर भी जांचें। इससे कम कीमत के साथ बेहतर शर्तों वाली डील चुनने में मदद मिल सकती है।
त्योहार के दूसरे खर्चों के लिए पैसे न बचाना
फेस्टिव बजट बनाते समय सिर्फ सामान खरीदने का खर्च शामिल करना एक आम गलती है। त्योहार के दौरान यात्रा, मेहमानों की मेजबानी, बाहर खाना, पूजा और अन्य जरूरी खर्च भी सामने आ सकते हैं।
इसलिए कुल बजट का कुछ हिस्सा इन खर्चों के लिए पहले से अलग रखना बेहतर है। इससे खरीदारी के बाद अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर वित्तीय दबाव कम रहेगा।
फेस्टिव शॉपिंग में सबसे जरूरी बात
त्योहारों की खरीदारी का मकसद खुशी और जरूरतें पूरी करना है, इसलिए ऑफर और खरीदारी के उत्साह में अपनी भुगतान क्षमता से आगे जाना ठीक नहीं है। पहले जरूरी चीजों की सूची बनाएं, फिर बजट तय करें और उसके बाद ही खरीदारी करें। इससे त्योहार का आनंद भी बना रहेगा और बाद में बजट बिगड़ने की चिंता भी कम होगी।

