नई दिल्ली। पंजाब में बिजली संकट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करने वाली सरकार के कार्यकाल में उद्योगों को कई घंटों की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि धान के सीजन में बिजली की मांग बढ़ने की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद सरकार पर्याप्त तैयारी नहीं कर सकी।
पंजाब में हाल के दिनों में औद्योगिक क्षेत्रों में 8 से 14 घंटे तक बिजली कटौती की रिपोर्ट सामने आई है। वहीं राज्य में बिजली की मांग भी 16,000 मेगावाट से ऊपर बनी हुई है।
बांसुरी स्वराज ने बिजली व्यवस्था पर उठाए सवाल
बांसुरी स्वराज ने कहा कि पंजाब सरकार को धान के सीजन के दौरान सिंचाई के लिए बिजली की बढ़ने वाली मांग का अनुमान था। उनके मुताबिक, इसके बावजूद बिजली आपूर्ति को लेकर पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई और अब संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
उन्होंने राज्य के बिजली उत्पादन से जुड़े आंकड़ों का भी हवाला दिया। स्वराज के अनुसार, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के सरकारी ताप विद्युत संयंत्रों का प्लांट लोड फैक्टर अगस्त में करीब 42 प्रतिशत रहा, जबकि निजी बिजली संयंत्रों में यह आंकड़ा करीब 92 से 93 प्रतिशत बताया गया।
कोयला स्टॉक को लेकर भी सवाल
स्वराज ने सरकारी बिजली संयंत्रों के पास पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने का दावा करते हुए कम उत्पादन पर सवाल उठाया। केंद्र के कोयला मंत्रालय ने भी 13 सितंबर को कहा था कि पंजाब के बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की उपलब्धता पर्याप्त है और 4 सितंबर तक PSPCL के संयंत्रों में कोयला स्टॉक निर्धारित मानक का करीब 117 प्रतिशत था। मंत्रालय ने कम PLF के लिए अन्य परिचालन कारणों की ओर संकेत किया।
हालांकि, पंजाब सरकार की ओर से बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने संकट के बीच केंद्र से मिलने वाली बिजली के हिस्से को लेकर अलग दावा किया था। उन्होंने कहा था कि राज्य को केंद्रीय बिजली पूल से उसके हिस्से की तुलना में 1,051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।
पावर कट से उद्योग और किसान दोनों प्रभावित
बिजली संकट का असर पंजाब के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में भी दिखाई दिया है। लुधियाना में उद्योगों ने 14 घंटे तक की कटौती के खिलाफ प्रदर्शन किया, जबकि किसानों ने भी सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की शिकायत की।
इसी बीच पंजाब सरकार ने दावा किया था कि 13 सितंबर से बिजली की कमी के कारण नए कट नहीं लगाए जा रहे हैं और किसानों को अतिरिक्त बिजली देने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने मांग में असामान्य बढ़ोतरी और निजी थर्मल प्लांटों में आई तकनीकी खराबी को भी संकट के कारणों में शामिल किया था।
बिजली संकट पर केंद्र और राज्य के दावे अलग
पंजाब के मौजूदा बिजली संकट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के दावों में अंतर सामने आया है। राज्य सरकार जहां केंद्रीय बिजली हिस्से और आपूर्ति से जुड़े मुद्दे उठा रही है, वहीं केंद्र का कहना है कि पंजाब के बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की उपलब्धता पर्याप्त रही है। इसी बीच भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने राज्य सरकार की तैयारी और बिजली उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।

