8th Pay Commission : नई दिल्ली — केंद्र सरकार के आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन से पहले ही कर्मचारियों ने अपनी मांगों का भारी-भरकम पुलिंदा खोल दिया है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF) ने आयोग की प्रश्नावली के जवाब में साफ कर दिया है कि अब पुराने ढर्रे पर महंगाई भत्ते (DA) की गणना मंजूर नहीं होगी। कर्मचारियों का तर्क है कि मौजूदा सिस्टम उनकी जेब पर पड़ रही असली महंगाई का बोझ कम करने में फेल साबित हो रहा है।
AICPI इंडेक्स पर सवाल: ‘बाजार भाव और सरकारी आंकड़े अलग’
अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का DA AICPI-IW (औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के 12 महीनों के औसत के आधार पर तय होता है। रक्षा कर्मचारी संगठन का दावा है कि इस इंडेक्स की ‘टोकरी’ में कई वस्तुओं की कीमतें राशन या सब्सिडी वाली दरों पर गिनी जाती हैं।
असलियत में, कर्मचारी खुले बाजार से सामान खरीदते हैं जहां कीमतें सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि नया इंडेक्स वास्तविक रिटेल कीमतों या सरकारी को-ऑपरेटिव स्टोर्स के रेट्स पर आधारित होना चाहिए।
वेतन आयोग के सामने रखी गई प्रमुख मांगें
6% इंक्रीमेंट: वर्तमान में सालाना 3% इंक्रीमेंट मिलता है, जिसे दोगुना करने की मांग है।
वेतन अनुपात: विभाग के सबसे ऊंचे और सबसे निचले वेतन के बीच का अंतर 1:10 से अधिक न हो।
अग्निवीर योजना: फिक्स्ड टर्म भर्ती को खत्म कर नियमित सेवा में बदलने का प्रस्ताव।
पेंशन सुरक्षा: सशस्त्र बलों और अन्य विभागों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी।
आगे का रास्ता: क्या सरकार मानेगी ये शर्तें?
अगर सरकार AIDEF की इन मांगों को स्वीकार करती है, तो यह पिछले तीन दशकों का सबसे बड़ा वेतन सुधार होगा। विशेष रूप से 6% सालाना इंक्रीमेंट और संशोधित DA फॉर्मूला सरकारी खजाने पर बड़ा असर डालेगा, लेकिन इससे लाखों कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ेगी। फिलहाल सबकी नजरें वित्त मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह इन सुधारों को आठवें वेतन आयोग के ढांचे में शामिल करता है या नहीं।