रिटायरमेंट के बाद नियमित मासिक आय हर व्यक्ति की सबसे बड़ी वित्तीय जरूरत होती है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) को लंबी अवधि के निवेश का एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। यदि समय रहते निवेश शुरू किया जाए और लगातार योगदान जारी रखा जाए, तो रिटायरमेंट तक बड़ा कोष तैयार किया जा सकता है, जिससे एकमुश्त राशि के साथ मासिक पेंशन का भी लाभ मिलता है।
50 हजार रुपये मासिक पेंशन के लिए कितना फंड चाहिए?
यदि रिटायरमेंट के बाद हर महीने 50 हजार रुपये पेंशन प्राप्त करना लक्ष्य है, तो इसके लिए पर्याप्त रिटायरमेंट फंड तैयार करना जरूरी होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि एन्युटी पर औसतन 6 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न माना जाए, तो सालाना 6 लाख रुपये यानी 50 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन पाने के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की एन्युटी खरीदनी पड़ सकती है। हालांकि, वास्तविक पेंशन की राशि उस समय की एन्युटी दर, चुनी गई कंपनी और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
एनपीएस के निकासी नियम क्या कहते हैं?
मौजूदा नियमों के अनुसार, एनपीएस में रिटायरमेंट के समय जमा कुल राशि का अधिकतम 60 प्रतिशत हिस्सा टैक्स फ्री एकमुश्त निकाला जा सकता है। वहीं, कम से कम 40 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है। कुछ श्रेणियों, विशेषकर सरकारी कर्मचारियों, के लिए अलग प्रावधान हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले अपने खाते से जुड़े नियमों की जानकारी लेना आवश्यक है।
5 करोड़ रुपये का फंड बनने पर क्या होगा?
यदि किसी निवेशक के पास रिटायरमेंट तक 5 करोड़ रुपये का कोष तैयार हो जाता है, तो नियमों के अनुसार कम से कम 40 प्रतिशत यानी 2 करोड़ रुपये से एन्युटी खरीदनी होगी। शेष 60 प्रतिशत यानी लगभग 3 करोड़ रुपये एकमुश्त निकाले जा सकते हैं। इस स्थिति में मिलने वाली मासिक पेंशन पूरी तरह एन्युटी की दर पर निर्भर करेगी। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी एनपीएस खातों में 80 प्रतिशत राशि निकाली जा सकती है या केवल 20 प्रतिशत से एन्युटी खरीदी जाएगी।
जल्दी निवेश शुरू करने का मिलता है बड़ा फायदा
एनपीएस में जितनी कम उम्र में निवेश शुरू किया जाता है, उतना अधिक समय निवेश को बढ़ने के लिए मिलता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 25 वर्ष की उम्र से नियमित निवेश शुरू करता है और उसे औसतन 10 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो वह रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार कर सकता है। वहीं 30 या 35 वर्ष की उम्र में शुरुआत करने पर समान लक्ष्य हासिल करने के लिए हर महीने अधिक राशि निवेश करनी पड़ सकती है, क्योंकि निवेश की अवधि कम हो जाती है।
लंबी अवधि की योजना है सफलता की कुंजी
एनपीएस उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहना चाहते हैं। नियमित निवेश, लंबी अवधि का दृष्टिकोण और सही वित्तीय योजना के जरिए भविष्य के लिए मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है, जिससे एकमुश्त धनराशि के साथ स्थिर मासिक पेंशन भी सुनिश्चित की जा सके।

