PM Modi Putin Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किए जाने की तमिलनाडु बीजेपी ने सराहना की है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने इसे भारतीय संस्कृति, तमिल भाषा और तिरुवल्लुवर की विचारधारा को वैश्विक मंच पर सामने रखने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
तमिल भाषा और भारतीय विरासत का किया जिक्र
नारायणन तिरुपति के मुताबिक, प्रधानमंत्री की इस पहल से तमिल साहित्य की समृद्ध परंपरा और तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं को दुनिया के सामने रखने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह कदम तमिल भाषा के प्रति प्रधानमंत्री की रुचि और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की सोच को भी दर्शाता है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि तिरुक्कुरल केवल तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण कृति नहीं है, बल्कि इसमें जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
पुतिन को रूसी भाषा में तिरुक्कुरल की प्रति भेंट
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण उन्हें भेंट किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि करीब दो हजार वर्ष पहले तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह ग्रंथ मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को समेटता है।
पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि रूसी भाषा में उपलब्ध तिरुक्कुरल भारत और रूस के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ाने में मदद करेगा। उनके अनुसार, लोगों के बीच बढ़ता संपर्क दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में भी अहम मुद्दों पर चर्चा
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित है।
ब्रिक्स देशों ने बैठक के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। इसमें पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता जताते हुए हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए संयम, बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
नागरिकों और महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा पर जोर
घोषणापत्र में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया गया है। सदस्य देशों ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में संचालित शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। परमाणु सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सशस्त्र संघर्ष की परिस्थितियों में भी सुनिश्चित करने की बात कही गई।
गाजा में मानवीय सहायता को लेकर भी अपील
ब्रिक्स घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही सभी पक्षों से युद्धविराम बनाए रखने और गाजा पट्टी तक मानवीय सहायता निर्बाध रूप से पहुंचाने का आग्रह किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में तिरुक्कुरल की रूसी प्रति की भेंट ने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर सामने रखने का एक अलग संदेश दिया है।

