नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब और गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के कई महत्वपूर्ण इलाकों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की है।बताया जा रहा है कि इन हमलों का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुल, एयरपोर्ट, बिजली केंद्र, रेलवे स्टेशन और अन्य बुनियादी ढांचे भी प्रभावित हुए हैं। इसके चलते कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई है।
बंदर अब्बास क्षेत्र बना अमेरिकी कार्रवाई का केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों का सबसे बड़ा केंद्र बंदर अब्बास और उसके आसपास का इलाका रहा। यह क्षेत्र ईरान के प्रमुख तटीय केंद्रों में शामिल है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।दावा किया जा रहा है कि यहां कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य तटीय क्षेत्रों और देश के अंदरूनी हिस्सों के बीच संपर्क और आपूर्ति व्यवस्था को कमजोर करना हो सकता है।हालांकि इन हमलों से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुल और परिवहन नेटवर्क को नुकसान की खबर
जानकारी के अनुसार, अमेरिकी हमलों में कई पुलों और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।इनमें काहूरस्तान ब्रिज, गरिवेह ब्रिज, कलामताली पुल और कुछ निर्माणाधीन पुलों के प्रभावित होने का दावा किया गया है।इसके अलावा बंदर अब्बास रेलवे स्टेशन और उससे जुड़े परिवहन मार्गों पर भी असर पड़ने की खबर है। रणनीतिक रूप से ये मार्ग समुद्री व्यापार और सामानों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
बिजली और संचार व्यवस्था पर भी असर
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमलों के कारण कुछ क्षेत्रों में बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।कई पावर स्टेशन और बिजली सब स्टेशन प्रभावित होने की बात कही गई है, जिसके चलते बंदर अब्बास, बुशहर, किश द्वीप और बंदर खमीर जैसे इलाकों में बिजली संकट की स्थिति बनने का दावा किया गया है।इसके अलावा कुछ स्थानों पर संचार नेटवर्क प्रभावित होने की जानकारी भी सामने आई है।
एयरपोर्ट और सैन्य ठिकाने भी निशाने पर
बताया जा रहा है कि अमेरिकी कार्रवाई केवल परिवहन और ऊर्जा ढांचे तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, एयरपोर्ट, कंट्रोल टावर, एयरबेस और नौसैनिक ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से किसी देश की सैन्य रसद और आवाजाही क्षमता पर असर डालने की कोशिश की जाती है।
अब ईरान के अगले कदम पर दुनिया की नजर
अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान एक ओर बातचीत की संभावना बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जवाबी रणनीति पर भी विचार कर रहा है।दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से मिले संकेतों से साफ है कि दबाव की नीति जारी रह सकती है।ऐसे में अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान की अगली प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच आगे की रणनीति पर टिकी हुई है।

