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Home»ट्रेंडिंग न्यूज़»‘शक्ति की सप्तधारा’ से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देंगे: शिवराज सिंह
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‘शक्ति की सप्तधारा’ से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देंगे: शिवराज सिंह

Daily PinchBy Daily PinchAugust 19, 2026
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘शक्ति की सप्तधारा’ संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े पूरे तंत्र को विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया। पूसा स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्ता, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात पर विशेष ध्यान देना होगा। कार्यक्रम में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासामी समेत चारों विभागों के सचिव, अधिकारी, कर्मचारी, वैज्ञानिक, किसान, लखपति दीदियां, फूड प्रोसेसर, निर्यातक और एफपीओ प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कृषि और फूड प्रोसेसिंग को बताया सप्तधारा की महत्वपूर्ण शक्ति

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण का स्पष्ट मार्ग देश के सामने रखा है। कृषि और फूड प्रोसेसिंग इस सप्तधारा की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। भारत को उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और वैश्विक मानकों के अनुरूप कृषि उत्पाद तैयार करने होंगे, ताकि भारतीय किसानों के उत्पाद दुनिया के बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकें। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े पूरे परिवार का सामूहिक संकल्प है। किसान, वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी, प्रोसेसर, निर्यातक, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और किसान उत्पादक संगठन इस अभियान के समान भागीदार हैं।

राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को स्थान देने और कर्तव्य को अपनी पहचान बनाने का आह्वान किया है। सरकारी सेवा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश और जनता की सेवा का संकल्प है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपने-अपने विभागों के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, ठोस रोडमैप तैयार करने और पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं परिश्रम के साथ उसे लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संकल्प तभी पूरे होंगे, जब सभी उन्हें अपना संकल्प मानकर काम करेंगे।

खेत से वैश्विक बाजार तक किसानों की उपज पहुंचाने पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कृषि को खेत से वैश्विक बाजार तक जोड़ना समय की आवश्यकता है। भारत में मिर्च, मसाले, फल, फूल, पारंपरिक खाद्य उत्पाद और विभिन्न कृषि उपजों की बड़ी विविधता है। गुणवत्ता में सुधार, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से किसानों की आय में महत्वपूर्ण वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसान, प्रोसेसर और निर्यातक एक-दूसरे से जुड़े हैं और इन सभी को एक मंच पर लाकर समन्वित तरीके से काम करना होगा। प्राकृतिक, जैविक और रसायन-मुक्त खेती से तैयार उत्पादों की देश और दुनिया में मांग बढ़ रही है। किसानों को इसके लिए तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार की जानकारी और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।

राष्ट्रीय से लेकर जिला स्तर तक कृषि रोडमैप

केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर के साथ प्रत्येक राज्य और जिले के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जलवायु, मिट्टी, पानी और फसल की परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की योजनाएं तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के बाजार में किस फसल की कितनी मांग है, इसका वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। इसी आधार पर किसानों को उपयुक्त फसलों, बेहतर गुणवत्ता और आधुनिक कृषि पद्धतियों के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य सरकारों और अन्य संस्थानों को मिलकर नई तकनीक किसानों तक पहुंचानी होगी।

तकनीक और एआई से बढ़ेगी कृषि उत्पादकता

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तकनीक, मशीनीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बेहतर बीज और आधुनिक कृषि पद्धतियों का इस्तेमाल बढ़ाकर उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार और तकनीकी समाधान किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए।

उत्पादन बढ़े, लागत घटे और उचित मूल्य मिले

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए सरकार की प्राथमिकता उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, गुणवत्ता सुधारना और किसानों को उचित मूल्य दिलाना है। किसानों को मौसम, बाजार और उत्पादन से जुड़ी सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, सिंचाई, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और कृषि आधारित आय के अन्य साधनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली और स्थानीय संसाधनों पर आधारित मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई।

छह करोड़ लखपति दीदियों का नया लक्ष्य

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में लखपति दीदी योजना को महत्वपूर्ण बताते हुए चौहान ने कहा कि तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अब छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ नई लखपति दीदियों के निर्माण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार और उद्यमिता के अवसर दिए जा रहे हैं।

‘शी-मार्ट’ और ब्रांडिंग को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘शी-मार्ट’ और ब्रांडिंग जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा। हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद, आयुर्वेदिक सामग्री, पारंपरिक वस्तुओं और अन्य उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे परिवार, गांव और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण शर्त है।

विकसित भारत के लिए विकसित गांव जरूरी

चौहान ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण विकसित गांवों के बिना संभव नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान, सड़क, जल संरक्षण, रोजगार, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और कृषि आधारित गतिविधियों को गति दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयों के साथ-साथ क्षेत्र में जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति देखने को कहा। उन्होंने कहा कि विभागीय आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। जल सुरक्षा, नदियों के पुनर्जीवन, भूमि संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाओं को भी तेजी से लागू करना होगा।

सफलता के चार सूत्र बताए

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और कर्मचारियों को काम के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए सफलता के चार सूत्र बताए- ‘पांव में चक्कर, मुंह में शक्कर, सीने में आग और माथे पर बर्फ।’ उन्होंने कहा कि ‘पांव में चक्कर’ का अर्थ लगातार चलते रहना और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में जाकर काम की समीक्षा करना है। ‘मुंह में शक्कर’ का अर्थ सहयोगियों और आम लोगों के साथ मधुर व्यवहार करते हुए मजबूत टीम बनाना है। ‘सीने में आग’ लक्ष्य हासिल करने के जुनून और जज्बे का प्रतीक है, जबकि ‘माथे पर बर्फ’ कठिन परिस्थितियों में धैर्य और संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है।

किसान, वैज्ञानिक और निर्यातक मिलकर बनाएंगे आत्मनिर्भर भारत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा। किसान, वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी, प्रोसेसर, निर्यातक, एफपीओ और स्वयं सहायता समूह इस पूरी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार अनुसंधान और तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने चाहिए। खेत से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला मजबूत होने से किसानों को बेहतर आय और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलेंगे।

किसानों और लखपति दीदियों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में किसानों, लखपति दीदियों, निर्यातकों और एफपीओ सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। ललिता ने लखपति दीदी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े अनुभव रखे। विनोद कुमार सैनी ने कृषि उत्पादन, तकनीक और बाजार से जुड़े विषयों पर विचार रखे। मुकेश जैन ने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े सुझाव दिए, जबकि प्रफुल्ल गोस्वामी ने एफपीओ और किसानों को बाजार से जोड़ने के संबंध में अपने विचार साझा किए।

चारों विभागों ने रखा रोडमैप

कार्यक्रम में चारों विभागों के सचिवों ने अपने विभागों का रोडमैप और प्राथमिकताएं प्रस्तुत कीं। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने कृषि अनुसंधान, नई तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार पर विचार रखे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतीश चंद्र ने कृषि उत्पादन, किसानों की आय और गुणवत्ता सुधार से जुड़े विषयों पर बात रखी। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने लखपति दीदी योजना, ग्रामीण आजीविका और विकसित गांवों से जुड़ी प्राथमिकताएं साझा कीं। भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने भूमि संरक्षण, जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विचार रखे।

‘शक्ति की सप्तधारा’ को धरातल पर उतारने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने उपस्थित लोगों को सामूहिक संकल्प दिलाया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर उद्घोषित ‘शक्ति की सप्तधारा’ को साकार करने के लिए पूरी निष्ठा, समर्पण और सामर्थ्य के साथ काम करेंगे। संकल्प में कृषि को समृद्ध बनाने, खाद्य उत्पादन को सशक्त करने, खाद्य प्रसंस्करण को व्यापक बनाने, भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने, किसानों की आय बढ़ाने और उनकी मेहनत को सम्मान दिलाने का संकल्प लिया गया।

चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का जो सपना देखा है, उसे संकल्प, सामर्थ्य और सफलता में बदलना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े सभी लोग मिलकर भारत को समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।


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