उत्तर प्रदेश : चंदौली जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के नाम पर लोगों को आसान लोन दिलाने का झांसा देता था। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह ने अलग-अलग लोगों के नाम पर करीब 300 बैंक खाते खुलवाए और बाद में इनका इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेन-देन में किया गया।
सरकारी लोन का झांसा देकर बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों से संपर्क कर उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कम ब्याज पर आसानी से लोन दिलाने का भरोसा देते थे। खास तौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जाता था।लोन की प्रक्रिया पूरी कराने के बहाने आरोपियों ने लोगों से निजी दस्तावेज और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल किया गया।
300 बैंक खातों से जुड़ा मिला नेटवर्क
जांच के दौरान पुलिस को करीब 300 बैंक खातों की जानकारी मिली है। आरोप है कि इन खातों में ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम मंगाई जाती थी और फिर अलग-अलग माध्यमों से आगे ट्रांसफर कर दी जाती थी।पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और अब तक कितने लोगों के बैंक खातों का दुरुपयोग किया गया है।
गिरोह के दूसरे सदस्यों की भी तलाश
पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं। उनकी भूमिका और नेटवर्क के संचालन से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही साइबर ठगी से जुड़ी रकम के स्रोत और उसके ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है।
लोन के नाम पर ठगी से कैसे बचें
पुलिस ने लोगों को साइबर अपराधियों से सावधान रहने की सलाह दी है। किसी भी सरकारी योजना के तहत लोन दिलाने के नाम पर अगर कोई अनजान व्यक्ति बैंक खाता खुलवाने या निजी जानकारी मांगता है, तो बिना सत्यापन के उसकी बात पर भरोसा न करें।अपना बैंक खाता, एटीएम विवरण, ओटीपी, पासवर्ड या जरूरी दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। सरकारी योजना और लोन से जुड़ी जानकारी के लिए केवल अधिकृत सरकारी माध्यमों का इस्तेमाल करें।
पुलिस की जांच से सामने आएगा पूरा नेटवर्क
चंदौली पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बैंक खातों की जांच के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा ठगी की कुल रकम का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

