गुजरात : ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिए पानी पहुंचाने वाली जल जीवन मिशन योजना को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय और कार्यान्वयन संबंधी खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक ठेकेदार को करीब 73 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। इसके अलावा पाइप खरीद और GST की गणना से जुड़ी गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया गया है।
घर-घर नल के लक्ष्य के बीच बदली गई व्यवस्था
जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर तक पाइप के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, CAG की जांच में कुछ परियोजनाओं में निर्धारित व्यवस्था से अलग काम किए जाने की बात सामने आई।कुछ स्थानों पर प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंचाने के बजाय सामुदायिक नल और पानी की टंकियों जैसी व्यवस्थाएं तैयार की गईं। इससे योजना के निर्धारित लक्ष्य और जमीन पर हुए काम के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
पाइप खरीद में भी अतिरिक्त भुगतान का मामला
CAG रिपोर्ट में पाइप की खरीद से संबंधित वित्तीय अनियमितता का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में करीब 54 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।इसके साथ ही GST की गलत गणना के कारण करीब 19 करोड़ रुपये कीवित्तीय हानि होने का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। इन आंकड़ों ने योजना के तहत भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कागजों और जमीन पर दिखी प्रगति में अंतर
ऑडिट के दौरान योजना से जुड़े रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच भी कुछ मामलों में अंतर पाया गया। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि कुछ जगहों पर दस्तावेजों में दिखाई गई प्रगति और मौके पर किए गए कार्य एक जैसे नहीं थे।ठेकेदारों के काम की निगरानी, परियोजनाओं के सत्यापन और भुगतान जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी ऑडिट में सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीण पानी की योजना पर अब बढ़ा जवाबदेही का दबाव
जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल का पानी पहुंचाने की केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। ऐसे में CAG की रिपोर्ट में सामने आई कमियां केवल वित्तीय प्रबंधन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि योजना के वास्तविक लाभ और काम की गुणवत्ता से भी जुड़ी हैं।रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है। अब निगाह इस बात पर है कि रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों के आधार पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
पानी की योजना में सिर्फ खर्च नहीं, सही काम भी जरूरी
ग्रामीण परिवारों तक साफ पानी पहुंचाने जैसी बुनियादी योजना में बजट का सही इस्तेमाल जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना भी है कि स्वीकृत परियोजना जमीन पर तय मानकों के अनुसार पूरी हो।CAG की रिपोर्ट ने भुगतान, निगरानी और वास्तविक कार्य की जांच को लेकर जो सवाल उठाए हैं, उनके जवाब से यह स्पष्ट होगा कि योजना में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

