Finance Company Faces Setback: अगर आपने किसी वाहन या दूसरी संपत्ति के लिए लोन लिया है और किसी वजह से EMI चुकाने में परेशानी हो रही है, तो सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने साफ किया है कि लोन की किस्तें नहीं चुकाने पर फाइनेंस कंपनी को अपना बकाया वसूलने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह वाहन को जबरन या मनमाने तरीके से अपने कब्जे में नहीं ले सकती।
मामला एक ट्रक लोन से जुड़ा था, जिसे चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी ने कथित तौर पर रात के समय कब्जे में लेकर बाद में बेच दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की कार्रवाई को उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना और कर्जदार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने के साथ ट्रक की बिक्री से मिली 4.50 लाख रुपये की रकम 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा मुकदमे की लागत के तौर पर 50 हजार रुपये भी देने को कहा गया।
रात में ट्रक ले जाने का क्या था मामला
हरि दत्ता शर्मा ने 2019 में चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से Tata SFC 407 ट्रक के लिए कमर्शियल व्हीकल लोन लिया था। लोन की रकम करीब 10.40 लाख रुपये थी और इसे 75 मासिक किस्तों में चुकाया जाना था। बाद में उन्हें अतिरिक्त लोन भी दिया गया था।
किश्तों में डिफॉल्ट होने के बाद कंपनी ने पहले भी वाहन अपने कब्जे में लिया था, लेकिन कुछ भुगतान किए जाने के बाद ट्रक वापस कर दिया गया था। इसके बाद दोबारा भुगतान में चूक हुई। 9 अप्रैल 2023 को करीब रात 1 बजे कुछ लोग ट्रक खड़े होने की जगह पहुंचे और स्टीयरिंग लॉक तोड़कर वाहन ले गए। शर्मा को बाद में कंपनी की कानूनी नोटिस के जरिए पता चला कि वाहन कंपनी ने अपने कब्जे में लिया था और 31 अगस्त 2023 को उसे 4.50 लाख रुपये में बेच दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना कंपनी का तरीका गलत
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि फाइनेंसर के पास बकाया रकम वसूलने का अधिकार है, लेकिन इसकी प्रक्रिया कानून और संबंधित लोन एग्रीमेंट के अनुरूप होनी चाहिए।
कोर्ट ने RBI की गाइडलाइन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत कर्ज की वसूली के दौरान अनुचित दबाव या बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। वाहन की जब्ती कानूनी तरीके से होनी चाहिए और रिकवरी एजेंटों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में कर्जदार अपनी आजीविका के लिए ट्रक पर निर्भर था। वाहन को मनमाने तरीके से अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई को कोर्ट ने उसके मौलिक अधिकारों से जोड़ा और मुआवजा देने का आधार माना।
फाइनेंस कंपनी को अब क्या-क्या देना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को कई निर्देश दिए हैं। इसके तहत:
- दोनों लोन अकाउंट बंद करने होंगे।
- ट्रक की बिक्री से मिली 4.50 लाख रुपये की रकम कर्जदार को लौटानी होगी।
- इस रकम पर वाहन की बिक्री की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
- मानसिक परेशानी और आजीविका प्रभावित होने के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देना होगा।
- मुकदमे की लागत के तौर पर 50 हजार रुपये भी देने होंगे।
कोर्ट ने वाहन की बिक्री को इस स्तर पर रद्द नहीं किया, क्योंकि ट्रक पहले ही बेचा जा चुका था। हालांकि, वाहन कब्जे में लेने और बेचने के तरीके को कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी।
EMI नहीं भर पा रहे हैं तो क्या करें
अगर किसी कारण से EMI चुकाने में परेशानी हो रही है तो सबसे पहले संबंधित बैंक या फाइनेंस कंपनी से संपर्क करना चाहिए। बकाया रकम, भुगतान की तारीख, रिकवरी नोटिस और लोन अकाउंट से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।
लोन डिफॉल्ट होने पर फाइनेंसर अपने अनुबंध और लागू कानूनों के तहत वसूली की कार्रवाई कर सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट है कि वाहन की जब्ती के दौरान बल प्रयोग, मनमानी या निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी को उचित नहीं माना जा सकता।
RBI को भी दिए गए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने RBI को भी निर्देश दिया है कि वह बैंकों और NBFCs की ओर से जारी रिकवरी संबंधी दिशानिर्देशों का वास्तविक रूप से पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, जहां किसी व्यक्ति को बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के उसकी आजीविका के साधन से वंचित कर दिया जाए।

