उज्जैन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर गुरुवार शाम दीपोत्सव का आयोजन किया गया। शिप्रा नदी के पवित्र रामघाट समेत शहर के कई प्रमुख स्थान दीयों की रोशनी से जगमगा उठे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शाम करीब 7 बजे रामघाट पहुंचे और यहां ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।
दीपोत्सव के साथ शिप्रा नदी की आरती और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। बाबा महाकाल मंदिर, महाकाल कॉरिडोर और कार्तिक मेला ग्राउंड सहित शहर के अलग-अलग हिस्सों में दीप प्रज्वलित किए गए।
26 हजार वॉलंटियर्स ने संभाली दीपोत्सव की जिम्मेदारी
आयोजन को बड़े स्तर पर आयोजित करने के लिए करीब 26 हजार वॉलंटियर्स को जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रत्येक वॉलंटियर को 112 दीये जलाने का दायित्व दिया गया। इसके चलते उज्जैन के प्रमुख धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर दीपों की आकर्षक रोशनी देखने को मिली।
रामघाट पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाया
नितिन नवीन पहले इंदौर में स्वामित्व योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद वे उज्जैन पहुंचे, जहां बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। शहर में रोड शो के बाद वे दत्त अखाड़ा पहुंचे।
दत्त अखाड़ा से नितिन नवीन नाव के जरिए शिप्रा नदी के रास्ते रामघाट पहुंचे। यहां उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित दीपोत्सव, भजन संध्या और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी उनके साथ मौजूद रहे।
नितिन नवीन ने पीएम मोदी के नेतृत्व को लेकर कही ये बातें
कार्यक्रम के दौरान बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के जीवन में बदलाव आया है। उन्होंने महिलाओं के लिए शौचालय निर्माण और लखपति दीदी योजना का भी जिक्र किया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए ब्रिक्स और जी-20 जैसे आयोजनों को भारत की वैश्विक पहचान से जोड़ा। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि वे जरूर आएं और यह भी दावा किया कि देश का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है।
उज्जैन में आयोजित यह दीपोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र रहा, जहां रामघाट से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों तक दीपों की रोशनी नजर आई।

