महासमुंद। सरकारी योजनाएं जब सही लाभार्थी तक पहुंचती हैं, तो छोटे कारोबार को भी नई दिशा मिल सकती है। महासमुंद जिले के ग्राम बेमचा निवासी विनोद कुमार सेन की कहानी इसकी मिसाल है। कभी गांव में सीमित संसाधनों के बीच हजामत का काम करने वाले विनोद ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का लाभ लेकर अपने छोटे से सेलून को आधुनिक रूप दिया। कारोबार बढ़ा तो अब वह खुद के साथ दो अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का जरिया बन चुके हैं।
छोटे सेलून से शुरू हुआ सफर
विनोद कुमार सेन बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत गांव में हजामत का काम करके की थी। इसके बाद उन्होंने अपने गांव में ही छोटा सा सेलून शुरू किया। आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण शुरुआत में वह अपने ग्राहकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे थे।
समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि आज ग्राहक सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि साफ-सफाई, बेहतर सुविधाओं और अच्छे अनुभव को भी महत्व देते हैं। इसी सोच ने उन्हें अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता तलाशने के लिए प्रेरित किया।
PM रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिली मदद
इसी दौरान विनोद को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, महासमुंद से संपर्क कर योजना की जानकारी ली। योजना की प्रक्रिया समझने के बाद उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया।
जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र ने आवेदन का परीक्षण करने के बाद इसे ऋण स्वीकृति के लिए भारतीय स्टेट बैंक, मेन ब्रांच महासमुंद भेजा। बैंक ने नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बाद विनोद को 2.50 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया।
आधुनिक सुविधाओं से बदला सेलून का स्वरूप
ऋण की राशि मिलने के बाद विनोद ने अपने सेलून में जरूरी आधुनिक सुविधाएं विकसित कीं। बेहतर सेटअप के साथ उन्होंने ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना शुरू किया।
सेलून का स्वरूप बदलने के साथ ग्राहकों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी। पुराने ग्राहक उनकी सेवाओं से संतुष्ट होकर अपने परिचितों को भी सेलून के बारे में बताने लगे। धीरे-धीरे यह छोटा कारोबार स्थायी आमदनी का साधन बन गया।
अब खुद के साथ दो लोगों को भी रोजगार
लगातार मेहनत और बेहतर ग्राहक सेवा के चलते विनोद कुमार सेन का कारोबार आगे बढ़ा। आज वह अपने व्यवसाय से परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बैंक ऋण की किश्तों का भी नियमित भुगतान कर रहे हैं।
सबसे खास बात यह है कि उनके कारोबार ने सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं किया, बल्कि दो अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार किया है। विनोद की यह कहानी दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही योजना, आर्थिक सहयोग और लगातार मेहनत से छोटे व्यवसाय को भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है।

