श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति के युक्तिसंगतीकरण को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने शनिवार को श्रीनगर में कैबिनेट सब-कमेटी की आरक्षण संबंधी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने रेजीडेंसी रोड की ओर मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने पार्टी कार्यालय का मुख्य द्वार रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कार्यालय के बाहर ही जुटे रहे।
PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती के नेतृत्व में कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मार्च रोकने के बाद इल्तिजा मुफ्ती समेत कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गेट के ऊपर से निकलकर रेजीडेंसी रोड की ओर जाने का प्रयास किया, लेकिन मार्च आगे नहीं बढ़ सका।
इल्तिजा मुफ्ती ने सरकार पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों की ओर से मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग के बाद सरकार ने उनकी चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन दिया था। उनके अनुसार, सरकार ने छह महीने के भीतर आरक्षण व्यवस्था से जुड़ी असंतुलन की शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था।
इल्तिजा ने आरोप लगाया कि करीब दो साल बीतने के बावजूद सब-कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से रिपोर्ट के निष्कर्ष और सिफारिशों को लोगों के सामने रखने की मांग की।
आरक्षण व्यवस्था में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा
इल्तिजा मुफ्ती ने मौजूदा आरक्षण ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों, जिनमें प्रोफेशनल कॉलेज भी शामिल हैं, की करीब 70 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। उनका दावा है कि ओपन मेरिट वर्ग के उम्मीदवारों को शेष 30 प्रतिशत अवसरों के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए जमीन और जीवनभर की बचत तक लगा देते हैं। ऐसे में सीमित अवसरों को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
दिसंबर 2024 में बनी थी आरक्षण समीक्षा समिति
आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठी शिकायतों और ओपन मेरिट अभ्यर्थियों के विरोध के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने दिसंबर 2024 में कैबिनेट सब-कमेटी गठित की थी। समिति को मौजूदा आरक्षण ढांचे की समीक्षा कर उसके युक्तिसंगतीकरण के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और उसके बाद की प्रक्रिया को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
PDP सहित विपक्षी दल रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से रिपोर्ट और उसके आगे की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग स्तर पर स्थिति स्पष्ट की गई है।
विधानसभा सत्र से पहले मुद्दे ने पकड़ा जोर
आरक्षण नीति का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र 21 सितंबर से प्रस्तावित है। ऐसे में सरकारी नौकरियों, भर्ती और आरक्षण से जुड़े सवालों के सदन में उठने की संभावना है।

