रायपुर। शहर में पानी की दिक्कत के बीच 230 एकड़ में फैले गजराजबंध तालाब को एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से बिना इस्तेमाल के इस तालाब को लेकर अब राज्यपाल रमेन डेका ने महापौर मीनल चौबे को इसे खारून के बाद शहर की नई लाइफलाइन बनाने का सुझाव दिया है। बुधवार को महापौर व निगम अधिकारी राज्यपाल के बुलावे पर मुलाकात करने पहुंचे थे, जिसके बाद राज्यपाल ने गजराजबंध सहित अन्य तालाबों के संरक्षण व उपयोगिता पर चर्चा की।
निगम अधिकारियों का भी मानना है कि तालाबों को अगर ठीक से विकसित किया गया तो लाखों लोगों को पानी मिल सकता है। कमल विहार के पास बोरियाखुर्द में यह बड़ा जलाशय रायपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है, लेकिन अब तक इसका कोई बड़ा उपयोग नहीं हो पाया है इस साल गर्मी में शहर में पेयजल संकट की जो स्थिति बनी, उसके बाद अब वैकल्पिक स्रोतों पर चर्चा तेज हो गई है।
1966 के अकाल में प्यास बुझाकर बचाई थी जान
जानकारी के मुताबिक, साल 1966 के अकाल के आसपास हजारों लोगों ने यहां पानी पीकर जान बचाई थी। इसकी उपयोगिता पहले भी साबित हो चुकी है। पहले यहां आरडीए की तरफ से एम्युजमेंट पार्क बनाने का प्रस्ताव भी था, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। विशेषज्ञों का भी कहना है कि यहां बारिश के पानी को स्टोर करके और फिल्टर प्लांट लगाकर प्रोसेस किया जाए, तो शहर को बड़ी मात्रा में पीने का पानी मिल सकता है। इससे खारून नदी पर जो निर्भरता है, वह भी कम हो सकती है। अभी भाठागांव फिल्टर प्लांट के जरिए शहर में पानी सप्लाई की जा रही है।
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31 करोड़ लीटर पानी की खपत रोजाना
शहर में 310 एमएलडी पानी की रोजाना सप्लाई की जा रही है। निगम अधिकारियों के मुताबिक राजधानी में रोजाना 31 करोड़ लीटर पानी की खपत है। वर्तमान में पानी की आपूर्ति खारून नदी से होती है। शहर में अभी 70 के करीब बड़े तालाब हैं, जो कि कभी 300 से ज्यादा हुआ करते थे।
तीन विभागों को मिलकर करना होगा काम
निगम सूत्रों के मुताबिक गजराजबंध तालाब सिंचाई विभाग की जमीन पर स्थित है, वहीं इसका कुछ हिस्सा रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) से लगा हुआ है, वहीं यह नगर-निगम सीमा के दायरे में है। जानकारों के मुताबिक राज्य बनने के पहले गजराजबंध तालाब सिंचाई के लिए एकमात्र विकल्प हुआ करता था।

