नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने सोमवार को ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक और नागरिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई, जिसमें ईरान पर एक कंटेनर जहाज पर हमला करने का आरोप लगा और जहाज में आग लगने के साथ एक चालक दल का सदस्य लापता हो गया।
राष्ट्रपति के निर्देश पर हुई कार्रवाई
सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर यह सैन्य अभियान चलाया गया। अमेरिका का कहना है कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिक जहाजों पर हमलों को रोकना इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य है।
ईरान के कई शहरों में विस्फोट की आवाज
ईरानी मीडिया के मुताबिक जास्क, बंदर अब्बास और सिरीक समेत दक्षिणी इलाकों में कई तेज विस्फोट सुनाई दिए। हालांकि सरकारी मीडिया ने दावा किया कि रिहायशी क्षेत्रों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और किसी नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है। सैन्य प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी कार्रवाई पर ईरान का कड़ा विरोध
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि कोई देश अपने सैन्य अड्डे या क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए करने देगा, तो उसे भी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप के दावों को बताया गलत
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापारिक गतिविधियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और खुला है। साथ ही मस्कट में हुई बातचीत को लेकर दिए गए अमेरिकी दावों को भी ईरान ने असत्य बताया।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान को भी कड़े संदेश दिए हैं। ये सभी देश होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित हैं और इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मौजूदा घटनाक्रम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

