नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को उपराष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और सैनिक स्कूलों की गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें एनसीसी के विस्तार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सैनिक स्कूलों की विकास योजनाओं और भविष्य की रणनीति से अवगत कराया।
बैठक में करीब 20 लाख कैडेटों वाले एनसीसी के संगठनात्मक विस्तार, प्रशिक्षण व्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। साथ ही सैनिक स्कूलों के नेटवर्क को मजबूत करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
उपराष्ट्रपति ने एनसीसी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ शिविरों को राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की प्रभावी पहल बताया।
इसके अलावा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसी सामाजिक गतिविधियों में एनसीसी कैडेटों की भागीदारी की भी प्रशंसा की। उन्होंने एनसीसी पूर्व छात्र संघ की स्थापना का स्वागत करते हुए इसे संगठन को और सशक्त बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
राज्य सरकारों के सहयोग पर दिया जोर
सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि एनसीसी को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार, आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने और बुनियादी ढांचे के विकास में राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। साथ ही इस दिशा में हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
हर राज्य में बढ़ें सैनिक स्कूलों की संख्या
बैठक में सैनिक स्कूलों के विस्तार और संचालन, खासकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भी चर्चा हुई। छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ती मांग को देखते हुए उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य में कम से कम तीन से पांच सैनिक स्कूल स्थापित किए जाने का लक्ष्य तय किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि जहां संभव हो, वहां मौजूदा सैनिक स्कूलों की प्रवेश क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण सैन्य शिक्षा का अवसर मिल सके।

