सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ा तनाव, क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजर
पश्चिम : एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान, सऊदी अरब और यमन से जुड़े ताजा घटनाक्रमों के बीच क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। हालांकि मौजूदा हालात गंभीर हैं, लेकिन यह कहना कि दुनिया निश्चित रूप से तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है, अभी स्थापित तथ्य नहीं है।
सना एयरपोर्ट पर हमले के बाद बढ़ी गतिविधियां
रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव फिर तेज हो गया है। सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे वर्ष 2022 से लागू अनौपचारिक युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
ट्रंप के समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई बातचीत में हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई। यह भी कहा जा रहा है कि इससे पहले सऊदी राजदूत और अमेरिकी विदेश मंत्री के बीच भी उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग स्तर पर देखी जानी चाहिए।
विमान को लेकर शुरू हुआ नया विवाद
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान की माहान एयर का एक विमान हूती नियंत्रित सना पहुंचा। ईरान समर्थित पक्ष का कहना है कि विमान प्रतिनिधिमंडल को वापस लेकर लौट रहा था। वहीं सऊदी समर्थित यमन सरकार का आरोप है कि विमान में हथियार, मिसाइलों के पुर्जे और सैन्य विशेषज्ञ भी मौजूद थे।
बताया गया कि विमान को रोकने के प्रयास में सना एयरपोर्ट के रनवे को निशाना बनाया गया, जिसके बाद विमान को अपना मार्ग बदलकर होदेदाह हवाई अड्डे की ओर जाना पड़ा। हालांकि विमान में हथियार होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
पाकिस्तान के सामने भी बढ़ सकती हैं चुनौतियां
क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है। सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग और वहां तैनात पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों के कारण इस्लामाबाद पर रणनीतिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान पहले से बलूचिस्तान में उग्रवाद, अफगानिस्तान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष और व्यापक होता है, तो पाकिस्तान के लिए संतुलित रुख बनाए रखना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

