नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक दशक से अधिक समय तक व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू करने और करीब 2,000 अप्रचलित नियमों को समाप्त करने के बाद भारत अब शासन व्यवस्था के नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रशासनिक सुधारों की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बनेंगी।
वह शिलांग में आयोजित अगली पीढ़ी के प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधारों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
‘सुधार एक्सप्रेस’ से बदलेगी प्रशासनिक व्यवस्था
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में ‘सुधार एक्सप्रेस’ का आह्वान किया है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक हितों पर केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की शासन प्रणाली में एआई, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
राष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे देशभर के अधिकारी
दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) और मेघालय सरकार ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनरैड के. संगमा, डीएआरपीजी की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा, मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद, अपर सचिव पुनीत यादव समेत केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
पारदर्शिता और जवाबदेही को मिली प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण से लेकर सार्वजनिक सेवाओं के वितरण तक नागरिकों को केंद्र में रखकर फैसले लिए जा रहे हैं।
‘शिलांग घोषणा 2.0’ बनने की उम्मीद
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित किए जा रहे हैं। इससे राज्यों के बीच सफल मॉडलों का आदान-प्रदान बढ़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन भी ‘शिलांग घोषणा 2.0’ के रूप में नई दिशा देगा।
पूर्वोत्तर के विकास का किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। प्रधानमंत्री करीब 80 बार पूर्वोत्तर का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने मेघालय के प्रसिद्ध ‘लिविंग रूट ब्रिजेस’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य सामुदायिक भागीदारी और नवाचार आधारित शासन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है।
डिजिटल इंडिया की उपलब्धियां गिनाईं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जन धन योजना, आधार आधारित सेवाएं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और यूपीआई ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि यूपीआई के माध्यम से हर महीने 18 अरब से अधिक डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान में अग्रणी बन गया है।
लोक शिकायत निवारण में एआई की बढ़ती भूमिका
उन्होंने बताया कि केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) अब दुनिया के सबसे बड़े तकनीक आधारित शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म में शामिल हो चुकी है। वर्ष 2014 में जहां करीब दो लाख शिकायतें दर्ज होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 25 लाख पहुंच गई है। एआई आधारित बहुभाषी चैटबॉट के जरिए शिकायतों का अधिक प्रभावी और संवेदनशील तरीके से समाधान किया जा रहा है।
2,000 पुराने नियम खत्म, प्रक्रियाएं हुईं आसान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने लगभग 2,000 अप्रचलित नियमों और अनुपालन संबंधी प्रावधानों को समाप्त कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और नागरिक हितैषी बनाया है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सुधार केवल तकनीक अपनाने से नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच में बदलाव से भी संभव होते हैं।
विशेष अभियान से बढ़ी कार्यकुशलता
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में शुरू किए गए लंबित मामलों के निपटान और स्वच्छता अभियान के तहत अप्रचलित सामग्री के वैज्ञानिक निस्तारण से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके साथ ही लगभग 700 लाख वर्ग फुट कार्यालय परिसर खाली कराकर सरकारी संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाई गई।
राज्यों से साझा अनुभव अपनाने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक-दूसरे की सफल प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सुधारों के अगले चरण में एआई आधारित प्रशासन, एकीकृत डिजिटल सेवाएं, साइबर सुरक्षा, प्रक्रिया सुधार, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और मजबूत संस्थागत ढांचे पर विशेष फोकस किया जाएगा।

