नई दिल्ली। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई स्थगित कर दी है। शीर्ष अदालत ने अब इस याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 12 अगस्त की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हिंदू पक्ष के विभिन्न पक्षकारों के बीच इस बात पर अनौपचारिक चर्चा चल रही है कि विवाद में किस याचिका को मुख्य मामला माना जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा सवाल
कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ताओं से पूछा कि क्या आपस में किसी प्रकार की बातचीत चल रही है। इस पर अदालत को बताया गया कि पक्षकारों के बीच कुछ अनौपचारिक स्तर पर चर्चा हो रही है।इस जानकारी के बाद पीठ ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष किसी मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहे हैं तो फिलहाल सुनवाई को आगे बढ़ाया जा सकता है।
बातचीत का जिक्र आदेश में नहीं करने की मांग
सुनवाई के दौरान एक पक्ष की ओर से अनुरोध किया गया कि अदालत के आदेश में पक्षकारों के बीच चल रही अनौपचारिक बातचीत का उल्लेख न किया जाए। उनका कहना था कि यह चर्चा न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है और केवल पक्षकारों के बीच सीमित है।इस पर अदालत ने कहा कि यदि सुनवाई स्थगित करने का आधार यही है तो आदेश में उसका उल्लेख किया जाना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
बार-बार स्थगन पर अदालत ने जताई चिंता
पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले की सुनवाई पहले भी कई बार टल चुकी है। ऐसे में यदि एक बार फिर सुनवाई स्थगित की जा रही है तो उसके पीछे उचित कारण होना चाहिए।अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी पक्ष पर बातचीत का दबाव नहीं बना रही है, लेकिन यदि पक्षकार स्वयं किसी विषय पर विचार कर रहे हैं तो उसे ध्यान में रखते हुए अगली तारीख दी जा सकती है।
किस आदेश को दी गई है चुनौती
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक अन्य मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
फिलहाल यथास्थिति बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने केवल प्रक्रिया संबंधी पहलुओं को देखते हुए सुनवाई 12 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।अब सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर है। माना जा रहा है कि तब तक पक्षकारों के बीच चल रही चर्चा की स्थिति स्पष्ट हो सकती है और अदालत आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर निर्णय ले सकती है।

