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Home»देश»एक पुराना दस्तावेज बना नई बहस की वजह… आखिर पूर्व जज का नाम क्यों आया चर्चा में?
देश

एक पुराना दस्तावेज बना नई बहस की वजह… आखिर पूर्व जज का नाम क्यों आया चर्चा में?

Daily PinchBy Daily PinchJuly 16, 2026
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मणिपुर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस (सेवानिवृत्त) सिद्धार्थ मृदुल एलपीजी गैस एजेंसी से जुड़े एक मामले को लेकर चर्चा में हैं। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने डीलरशिप नियमों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए संबंधित गैस एजेंसी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मामले के सामने आने के बाद न्यायिक आचार संहिता और हितों के टकराव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

न्यायिक सेवा के दौरान भी डीलरशिप रहने का आरोप

जानकारी के अनुसार वर्ष 1984 में जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल के नाम ‘किचन फ्लेम’ नाम से एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप आवंटित की गई थी। बाद में वर्ष 2008 में उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला और वर्ष 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।

आरोप है कि न्यायिक पद पर रहते हुए भी डीलरशिप उनके नाम पर बनी रही और समय-समय पर उससे जुड़े अनुबंधों का नवीनीकरण भी होता रहा।

अनुबंधों के नवीनीकरण पर उठे सवाल

बताया जा रहा है कि अलग-अलग वर्षों में डीलरशिप के अनुबंधों का नवीनीकरण किया गया। हाल के कुछ दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर और अन्य आवश्यक अभिलेख भी शामिल होने का दावा किया गया है।

इसी के बाद यह सवाल उठने लगे कि संवैधानिक पद पर रहते हुए निजी व्यावसायिक हितों से दूरी बनाए रखने की अपेक्षा के बावजूद यह व्यवस्था कैसे जारी रही।

अदालती याचिका से खुला मामला

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब गैस एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की पत्नी ने एजेंसी के स्वामित्व हस्तांतरण को लेकर अदालत में याचिका दायर की। याचिका में एजेंसी का संचालन अपने नाम करने की मांग की गई थी।

इसी प्रक्रिया के दौरान डीलरशिप से जुड़े दस्तावेज और स्वामित्व संबंधी जानकारी सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई।

बीपीसीएल ने की कार्रवाई

मामले की समीक्षा के बाद बीपीसीएल ने संबंधित पक्ष को कई कारण बताओ नोटिस जारी किए। कंपनी का कहना है कि यदि डीलरशिप संचालन से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया है तो इसे अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा।

कंपनी के अनुसार निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद डीलरशिप का लाइसेंस निलंबित करने का फैसला लिया गया।

निलंबन के बाद फिर अदालत पहुंचा मामला

डीलरशिप निलंबित होने के बाद संबंधित पक्ष ने दोबारा अदालत का रुख किया। उनका कहना है कि स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उन्हें परिस्थितियों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पहलू पर न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

हितों के टकराव पर फिर छिड़ी बहस

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कानूनी विशेषज्ञों के बीच न्यायिक पदों पर बैठे या रह चुके व्यक्तियों के लिए हितों के टकराव से बचने और पारदर्शिता बनाए रखने के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं की प्रक्रिया जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध रिकॉर्ड तथा संबंधित जांच के आधार पर तय की जाएगी।


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