रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देने वाली प्रोविडेंट फंड व्यवस्था अब नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं रह सकती है। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन यानी EPFO असंगठित क्षेत्र के कामगारों, गिग वर्कर्स, फ्रीलांसरों और स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए एक नई यूनिवर्सल पीएफ योजना पर विचार कर रहा है।इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन लोगों को भी बचत और सामाजिक सुरक्षा का विकल्प देना है, जो मौजूदा समय में EPF व्यवस्था से बाहर हैं।
नई योजना से किन लोगों को मिल सकता है मौका
मौजूदा व्यवस्था में EPF का लाभ मुख्य रूप से उन कर्मचारियों को मिलता है, जो 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में काम करते हैं। लेकिन नई यूनिवर्सल पीएफ योजना लागू होने पर इसका दायरा काफी बढ़ सकता है।इसमें फ्रीलांसर, छोटे कारोबारी, दुकानदार, कंसल्टेंट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स, कैब चालक, डिलीवरी पार्टनर और अन्य स्वरोजगार करने वाले लोग भी स्वेच्छा से पीएफ खाता खोलकर बचत कर सकते हैं।
लंबे समय के लिए तैयार होगा आर्थिक सुरक्षा कवच
भारत में बड़ी संख्या में लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जहां रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का कोई निश्चित साधन नहीं होता। ऐसे लोगों के लिए यह योजना भविष्य की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है।EPFO में जमा राशि पर सरकार द्वारा तय दर के अनुसार ब्याज मिलता है, जिससे लंबे समय में एक अच्छा रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है।
पीएफ पर मिल रहा है आकर्षक ब्याज
वर्तमान में पीएफ जमा पर 8.25 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। यह कई पारंपरिक बचत योजनाओं की तुलना में बेहतर माना जाता है। इसके अलावा पीएफ में जमा राशि पर टैक्स से जुड़े कुछ लाभ भी मिलते हैं।
आय के हिसाब से जमा करने की मिल सकती है सुविधा
यूनिवर्सल पीएफ योजना की खास बात यह हो सकती है कि इसमें नियमित नौकरी करने वालों की तरह हर महीने तय रकम जमा करने की बाध्यता नहीं होगी।अनियमित आय वाले लोग अपनी सुविधा के अनुसार रोजाना, मासिक या सालाना आधार पर योगदान कर सकते हैं। इससे फ्रीलांसर और स्वरोजगार करने वाले लोगों को बचत करना आसान हो सकता है।
लेकिन योगदान को लेकर होगी बड़ी चुनौती
मौजूदा EPF व्यवस्था में कर्मचारी के योगदान के साथ कंपनी भी अपनी ओर से राशि जमा करती है। लेकिन प्रस्तावित यूनिवर्सल पीएफ योजना में फिलहाल ऐसी व्यवस्था की संभावना नहीं है।इसका मतलब है कि इसमें जमा होने वाली पूरी राशि व्यक्ति को खुद ही जमा करनी होगी। नियोक्ता या सरकार की ओर से योगदान मिलने की संभावना अभी स्पष्ट नहीं है।
जरूरत के समय पैसे निकालने में हो सकती है परेशानी
पीएफ जैसी योजनाएं लंबी अवधि की बचत के लिए बनाई जाती हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने के लिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है।समय से पहले निकासी पर शर्तें लागू हो सकती हैं और पांच साल से पहले निकासी करने पर टैक्स संबंधी असर भी पड़ सकता है। इसलिए यह योजना उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी होगी, जो भविष्य की सुरक्षा के लिए लंबे समय तक बचत करना चाहते हैं।
करोड़ों असंगठित कामगारों के लिए बदल सकता है भविष्य
यदि EPFO की यह योजना मंजूर होती है तो देश के करोड़ों असंगठित क्षेत्र के लोगों को पहली बार संगठित रिटायरमेंट बचत व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। हालांकि योजना को अंतिम रूप मिलने और लागू होने के बाद ही इसके नियम पूरी तरह स्पष्ट हो पाएंगे।

