भोपाल। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के प्रतिबंधों के बावजूद नर्मदा नदी में कथित अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने और आई बाढ़ के बाद अवैध खनन से जुड़े इंतजाम उजागर हो गए। बाढ़ के तेज बहाव में नदी के भीतर बनाया गया अस्थायी मार्ग बह गया, जिससे उत्खनन में लगी भारी मशीनें और डंपर बीच नदी में फंस गए।
अस्थायी रैंप बनाकर किया जा रहा था उत्खनन
जानकारी के अनुसार, एक निजी कंपनी पर आरोप है कि उसने रेत निकालने के लिए नर्मदा की प्राकृतिक धारा में अस्थायी रैंप तैयार किया था। इसी मार्ग के जरिए भारी पोकलेन मशीनें और डंपर नदी के भीतर पहुंचाए गए थे, जहां बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही थी।
बाढ़ में बह गया रास्ता, मशीनें नदी के बीच अटकीं
ऊपरी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के बाद नर्मदा का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव में नदी के भीतर बनाया गया अस्थायी मार्ग पूरी तरह बह गया। इसके चलते उत्खनन कार्य में लगी कई पोकलेन मशीनें और डंपर नदी के बीच फंस गए, जिन्हें बाहर निकालना चुनौती बन गया है।
प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
घटना के बाद प्रशासन और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद लंबे समय से नदी में भारी मशीनों के जरिए उत्खनन किया जा रहा था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली या समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सुरक्षा और पर्यावरण दोनों पर चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाढ़ के समय मशीनों पर श्रमिक मौजूद होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। साथ ही नदी की प्राकृतिक धारा में हस्तक्षेप से पर्यावरणीय संतुलन और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में जांच और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

