मुंबई। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय सरकारी बॉन्ड पर भी दिखाई देने लगा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने फुली एक्सेसिबल रूट के तहत आने वाली सरकारी सिक्योरिटीज से पिछले कुछ दिनों में बड़ी रकम निकाल ली है। क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार 9 सितंबर से 15 सितंबर के बीच FAR के तहत सरकारी सिक्योरिटीज में FPI निवेश करीब ₹5,109 करोड़ घट गया।
9 सितंबर को FAR के तहत सरकारी सिक्योरिटीज में FPI निवेश ₹3,71,915.496 करोड़ था, जो 15 सितंबर को घटकर ₹3,66,806.286 करोड़ रह गया। आंकड़ों के मुताबिक 10 सितंबर को यह राशि ₹3,71,520.751 करोड़ और 11 सितंबर को ₹3,66,791.286 करोड़ थी।
विदेशी निवेशकों पर क्यों बढ़ा दबाव
चॉइस वेल्थ के वाइस प्रेसिडेंट माताप्रसाद पांडे के मुताबिक FAR रूट के तहत भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की अहम भूमिका है।
उनके अनुसार मध्य पूर्व में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये पर दबाव ने भारतीय सरकारी कर्ज को विदेशी निवेशकों के लिए पहले की तुलना में कम आकर्षक बनाया है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ी है। सप्लाई को लेकर आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 107.41 डॉलर प्रति बैरल बताई गई है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल पर दबाव डाल सकता है और इससे रुपये तथा महंगाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
US Treasury Yield 5 फीसदी के पार पहुंची
वैश्विक बॉन्ड बाजार में भी दबाव देखने को मिला। बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट की यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5 फीसदी के स्तर से ऊपर पहुंची। ऊंची यील्ड विकसित बाजारों की संपत्तियों को वैश्विक निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक बना सकती है।
ऐसी स्थिति में उभरते बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर सरकारी बॉन्ड, स्थानीय मुद्रा और घरेलू स्तर पर कर्ज की लागत पर पड़ सकता है।
रुपये में भी तेज गिरावट
विदेशी पूंजी के दबाव के बीच भारतीय मुद्रा पर भी असर पड़ा। मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे कमजोर होकर 95.96 के स्तर पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के साथ रुपये में गिरावट को भी विदेशी निवेशकों के फैसले को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। बाजार में आगे भी तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निवेशक

