ISRO Scientists Resignation: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफों की खबरों के बीच गगनयान मिशन को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि किसी भी संस्थान में वैज्ञानिकों का आना और जाना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसका असर देश के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों की प्रगति पर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि गगनयान मिशन समेत ISRO की सभी महत्वपूर्ण परियोजनाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफों से उठे थे सवाल
पिछले कुछ समय में ISRO के कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबरें सामने आई थीं। इनमें लॉन्च व्हीकल मार्क-3 और चंद्रयान कार्यक्रम से जुड़े कुछ वैज्ञानिकों के नाम भी चर्चा में रहे।
कई अंतरिक्ष केंद्रों से इस्तीफों की खबरों के बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या अनुभवी वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने से भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की समयसीमा और कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
महत्वपूर्ण मिशनों के लिए नियम किए गए सख्त
इन चिंताओं के बीच अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान और अन्य संवेदनशील परियोजनाओं से जुड़े ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे से जुड़े नियमों को पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सख्त किया है।
सरकार का उद्देश्य महत्वपूर्ण अभियानों में विशेषज्ञता बनाए रखना और रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
ISRO किसी एक वैज्ञानिक पर निर्भर नहीं: जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO की कार्यप्रणाली किसी एक व्यक्ति के आधार पर नहीं चलती, बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था और टीमवर्क पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद छोड़ने से कोई मिशन रुक नहीं जाता। नए वैज्ञानिक लगातार संगठन से जुड़ते हैं और अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से परियोजनाओं में निरंतरता बनी रहती है।
चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 का दिया उदाहरण
जितेंद्र सिंह ने पूर्व ISRO अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों में सफलता हासिल की।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के पद पर न रहने से अंतरिक्ष कार्यक्रमों की गति प्रभावित नहीं होती, क्योंकि ये अभियान लंबे समय की वैज्ञानिक योजना, टीमवर्क और संस्थागत क्षमता के आधार पर आगे बढ़ते हैं।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र बढ़ने से वैज्ञानिकों को मिले नए अवसर
सरकार ने यह भी माना कि देश में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार के बाद वैज्ञानिकों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। निजी कंपनियों में शोध, नवाचार और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने के कारण कुछ वैज्ञानिक वहां भी जा रहे हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि ISRO के पास प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों की मजबूत टीम मौजूद है और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया लगातार जारी है।
कुडनकुलम डेटा लीक मामले पर भी सरकार ने दी जानकारी
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े डेटा लीक की खबरों पर भी मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी संवेदनशील या रणनीतिक डेटा में सेंधमारी की पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और तकनीकी स्तर पर सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। सरकार के अनुसार फिलहाल ऐसी कोई स्थिति सामने नहीं आई है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा या रणनीतिक परियोजनाओं पर कोई गंभीर प्रभाव पड़े।

