नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने देवघर कोषागार से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें लालू यादव की जमानत रद्द करने और झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके साथ ही अदालत ने फिलहाल उनकी जमानत को यथावत बनाए रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस स्तर पर झारखंड हाईकोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी माना कि हाईकोर्ट का जमानत आदेश कई वर्ष पुराना है, जबकि सीबीआई की अपील वर्ष 2018 से लंबित है।
हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई पूरी करने का निर्देश
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह लालू प्रसाद यादव की ओर से निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई में तेजी लाए। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले का जल्द निपटारा न्यायहित में आवश्यक है।
सीबीआई ने जमानत पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि लालू यादव की जमानत याचिका पहले दो बार खारिज हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि बाद में हाईकोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि आरोपी अपनी सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर चुके हैं, जबकि जांच एजेंसी के अनुसार यह तथ्य सही नहीं था।
सीबीआई का यह भी कहना था कि अलग-अलग मामलों में सुनाई गई सजाएं एक साथ चलने वाली नहीं थीं और इस कानूनी पहलू पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
फिलहाल बरकरार रहेगी लालू यादव की जमानत
सीबीआई की दलीलों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय बाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। हालांकि अंतिम फैसला झारखंड हाईकोर्ट में लंबित अपील के निस्तारण के बाद ही सामने आएगा।
अब हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत फिलहाल जारी रहेगी। अब पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण झारखंड हाईकोर्ट की सुनवाई होगी, जहां अपील पर शीघ्र निर्णय लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

