मुंबई। महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने शिकायत रखे जाने के बाद विवादित जमीन से जुड़ी निर्माण अनुमति को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया जा रहा सेवन इलेवन ट्रस्ट अब मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी MBMC को अपनी बिल्डिंग निर्माण अनुमति वापस सौंप चुका है।
मामला भायंदर के इंद्रलोक इलाके में सर्वे नंबर 240 की जमीन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता असगर अली वोहरा ने जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण अनुमति को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि, अनुमति वापस होने के बावजूद जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े मूल विवाद का अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है।
PM मोदी से मुलाकात के बाद फिर चर्चा में आया मामला
असगर अली वोहरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर जमीन विवाद से जुड़ी अपनी शिकायत रखी थी। उनका आरोप था कि जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव होने के बाद भी स्थानीय निकाय की ओर से निर्माण अनुमति वापस नहीं ली गई।
वोहरा ने प्रशासनिक प्रक्रिया और जमीन के दस्तावेजों को लेकर हस्तक्षेप की मांग की थी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा में आ गया।
7/12 रिकॉर्ड में बदलाव का भी उठाया गया मुद्दा
शिकायतकर्ता के अनुसार, इंद्रलोक क्षेत्र की सर्वे नंबर 240 वाली जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। वोहरा ने आरोप लगाया था कि सोहम डेवलपर्स और सेवन इलेवन से जुड़े लोगों ने जमीन पर कथित तौर पर कब्जा किया।
शिकायत के बाद राजस्व विभाग की कार्रवाई में जमीन के 7/12 रिकॉर्ड में दर्ज कंपनी के नाम को हटाए जाने का दावा किया गया। महाराष्ट्र में 7/12 उतारा जमीन से जुड़े स्वामित्व और अन्य राजस्व विवरणों के लिए अहम दस्तावेज माना जाता है।
वोहरा का कहना था कि राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव के बावजूद MBMC की निर्माण अनुमति कायम रही, जिस पर उन्होंने सवाल उठाए।
निर्माण अनुमति बनी विवाद की सबसे अहम कड़ी
इस पूरे विवाद में MBMC की ओर से जारी निर्माण अनुमति मुख्य मुद्दों में रही। शिकायतकर्ता का तर्क था कि जब जमीन के रिकॉर्ड और अधिकार को लेकर आपत्तियां दर्ज हो चुकी थीं, तब निर्माण की अनुमति पर भी पुनर्विचार होना चाहिए था।
अब सेवन इलेवन ट्रस्ट की ओर से अनुमति वापस किए जाने के बाद निर्माण से जुड़ा विवाद फिलहाल नए चरण में पहुंच गया है। हालांकि, इससे जमीन के मालिकाना हक या कथित कब्जे से जुड़े सभी सवाल अपने आप खत्म नहीं होते।
सेवन इलेवन ट्रस्ट ने क्यों लौटाई परमिशन?
विवाद और लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच सेवन इलेवन ट्रस्ट ने MBMC को निर्माण अनुमति वापस सौंप दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट की ओर से इस फैसले के पीछे विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ऐसे में अनुमति वापस करने का कदम किस प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया, यह संबंधित दस्तावेजों और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।
नरेंद्र मेहता से जुड़ने के कारण राजनीतिक चर्चा भी तेज
जमीन विवाद का राजनीतिक पहलू इसलिए भी सामने आया क्योंकि शिकायतकर्ता ने मामले में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़े संस्थानों की भूमिका का आरोप लगाया था। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच, दस्तावेजों और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकेगी।
फिलहाल जमीन के स्वामित्व, कथित कब्जे और निर्माण अनुमति से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है।
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
निर्माण अनुमति वापस होने के बाद अब निगाहें राजस्व रिकॉर्ड, जमीन के स्वामित्व दस्तावेजों और स्थानीय निकाय की अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा पर हैं। आगे की प्रशासनिक कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि विवादित जमीन को लेकर किन कानूनी और रिकॉर्ड संबंधी पहलुओं पर निर्णय लिया जाता है।
फिलहाल सेवन इलेवन ट्रस्ट द्वारा निर्माण अनुमति लौटाने से निर्माण से जुड़ा विवाद जरूर नए मोड़ पर पहुंचा है, लेकिन जमीन के अधिकार और कथित कब्जे से जुड़े मूल सवाल अभी भी जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के दायरे में हैं।

