रायपुर। राज्यभर में आज 16 जून से नए सत्र की शुरुआत तो हो रही है लेकिन प्रवेश उत्सव की तैयारियां स्कूलों में शून्य है। स्कूलों में इसके लिए कोई तैयारियां ही नहीं दिखाई दी। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि स्कूलों में अब तक न तो गणवेश पहुंच पाया है और न ही किताबें, जिसके कारण शाला प्रवेश उत्सव होगा भी तो केवल खानापूर्ति के लिए। राजधानी के ज्यादातर स्कूलों में तो प्रवेश उत्सव स्कूल खुलने के पहले दिन मनाया ही नहीं जाएगा। राज्यभर में शाला प्रवेश उत्सव 27 जून तक आयोजित किए जाएंगे। हर साल प्रवेश उत्सव में विद्यार्थियों को ड्रेस व किताबें दी जाती थी लेकिन इस बार दोनों न होने के कारण इसमें काफी असमंजस की स्थिति है।
समिति के सदस्य भी कर रहे आनाकानी
रायपुर के एक शिक्षक ने बताया कि शाला विकास समिति के सदस्य भी प्रवेश उत्सव को लेकर आनाकानी कर रहे है। कोई कहीं है तो किसी को कुछ और काम है। जिसके चलते ज्यादातर स्कूलों में स्कूल तो खुल जाएंगे पर बच्चों के आने पर खानापूर्ति के लिए केवल चंदन ही लगाकर उनका स्वागत किया जाएगा। कई स्कूलों में यह भी तैयारी है कि स्कूल खुलने के बाद बैठक की जाए और प्रवेश उत्सव की तैयारी की जाएं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समितियों और पालकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने मुनादी कराने की भी प्लानिंग थी। लेकिन रायपुर के ज्यादातर स्कूलों में पहले दिन के लिए मुनादी ही नहीं कराई गई है।
वितरण की योजना हर जगह संभव नहीं
विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देश में कहा गया था कि प्रवेश उत्सव पर विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, स्कूल गणवेश, साइकिल का वितरण किया जाएगा। लेकिन रायपुर में यह हो पाना संभव प्रतित नहीं होता है। प्रवेश उत्सव में बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में टॉप करने वाले होनहार विद्यार्थियों और उत्कृष्ट पालकों को भी सम्मानित किया जाएगा। अभियान में स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। इच्छुक नागरिक बच्चों को स्लेट, पेंसिल, कॉपी, कंपास बॉक्स और स्कूल बैग जैसी सामग्रियां भी दान कर सकेंगे।

