मुंबई। महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर इलाके में करीब 15 साल से चल रहे जमीन विवाद में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी जमीन से जुड़े विवाद में हस्तक्षेप और CBI जांच की मांग की थी। इसके करीब एक सप्ताह बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और उससे जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। हालांकि जमीन के मालिकाना हक से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलू अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
1989 में खरीदी जमीन को लेकर 15 साल से विवाद
असगरअली वोहरा के मुताबिक, उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि 2011 में उनकी जानकारी के बिना जमीन पर कब्जा किया गया और कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर कर इसे दो हिस्सों में दिखाया गया।
वोहरा ने इस मामले में स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस का नाम लिया था। उनका आरोप रहा है कि सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस का संबंध नरेंद्र मेहता से है। इन आरोपों को लेकर 2015 में FIR भी दर्ज हुई थी। मामले को लेकर वोहरा लंबे समय से पुलिस, राजस्व विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के सामने शिकायतें करते रहे हैं।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद तेज हुई प्रक्रिया
वोहरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों ने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। मुलाकात के दौरान वोहरा ने जमीन विवाद की जानकारी देते हुए मामले की जांच कराने और हस्तक्षेप की मांग की थी।
इसके बाद मीरा-भायंदर नगर निगम ने मामले को लेकर संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया। 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई में संबंधित कंपनियों और अन्य पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया था।
सरकार की बैठक में सामने आया नया घटनाक्रम
मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में मंत्रालय में बैठक हुई। इसमें असगरअली वोहरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के बाद नरेंद्र मेहता की ओर से टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र दिया गया। इसमें उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही। मेहता के मुताबिक, संबंधित जमीन 2019 में खरीदी गई थी।
सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने भी निर्माण अनुमति लौटाई
मामले में सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस की ओर से भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कंपनी ने मीरा-भायंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र भेजकर प्लॉट से जुड़ा कमेंसमेंट सर्टिफिकेट सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू की है।
कंपनी के दस्तावेज के मुताबिक, उसने 2019 में रजिस्टर्ड डीड के जरिए जमीन खरीदी थी और बाद में निर्माण से जुड़ी अनुमति प्राप्त की थी। जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद सामने आने के बाद कंपनी ने निर्माण परमिट वापस करने का निर्णय लिया।
पुरानी पुलिस शिकायत भी वापस लेने की बात
नरेंद्र मेहता की ओर से पुलिस कमिश्नर को भी पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें उन्होंने असगरअली वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही है। मेहता के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है।
इससे पहले 2015 में दर्ज शिकायत में वोहरा और ढोका पर अतिक्रमण तथा धमकी जैसे आरोप लगाए गए थे। अब शिकायत वापस लेने की प्रक्रिया के साथ विवाद में एक और अहम बदलाव सामने आया है।
मालिकाना हक का अंतिम फैसला अभी बाकी
ताजा घटनाक्रम से विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन जमीन के वास्तविक मालिकाना हक और पुराने आरोपों से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं का अंतिम निपटारा अलग प्रक्रिया का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जमीन से जुड़े विवाद पर कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही पहले से चल रही थी।
ऐसे में निर्माण अनुमति लौटाने और कब्जा छोड़ने की घोषणा के बाद अब आगे की कार्रवाई और संबंधित रिकॉर्ड में होने वाले बदलाव पर नजर रहेगी।

