प्रयागराज : आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर मंगलवार को त्रिवेणी संगम आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना रहा। तड़के से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम तट पहुंचे और पवित्र स्नान कर अपने पितरों की शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में मंगल की कामना की। इस दौरान तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी पूरे विधि-विधान से संपन्न किए गए।
अमावस्या और मंगलवार का संयोग बना खास
संगम तट पर मौजूद संतों ने बताया कि त्रिवेणी संगम में स्नान का महत्व पूरे वर्ष रहता है, लेकिन अमावस्या का दिन विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है। इस बार अमावस्या मंगलवार को पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि इस शुभ संयोग में संगम स्नान, तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
पितरों की कृपा से मिलता है सुख और समृद्धि का आशीर्वाद
संतों के अनुसार, जब पितर प्रसन्न होते हैं तो देवी-देवताओं की कृपा भी परिवार पर बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
श्रद्धालुओं ने की परिवार और देश की खुशहाली की प्रार्थना
संगम में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि आषाढ़ अमावस्या पितरों के स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। पूर्वजों के नाम से तर्पण और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली के साथ-साथ देश की उन्नति, शांति और सभी की मनोकामनाएं पूरी होने की भी प्रार्थना की।
दिनभर चलता रहा धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम
आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर संगम क्षेत्र में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। स्नान के बाद लोगों ने विधि-विधान से पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था का वातावरण देखने को मिला, जहां हर कोई अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए सुखद भविष्य की कामना करता नजर आया।

